- पद 5भजनकेह गन्ध-द्रब्य दे-इ अङ्गे
से ना अन्ग गन्धे गन्ध-मद हरे, उपमा दिब कि सङ्गे
“हरे कृष्ण” के परिणाम
558 भजन · 980 पद भजन के शब्दों में · 802 पद अर्थ में
इनमें से कोई भी शब्द वाले भजन, सारे शब्दों वाले पहले। केवल सारे शब्दों वाले भजन
1 पद भजन में
1 पद भजन में
- पद 4भजनकाणे कुण्डल अर्पण करे
झलकये गण्ड-तटे गण्ड-युग दर्पण दरप हरे
1 पद भजन में
- पद 4भजनअङ्गेर भङ्गीते प्राण हरे
रूपेर छटाय दश-दिक् आलो करे
1 पद भजन में
- पद 2भजनकेह करु-प्रति कहे देख मिश्र-सनातन सुखे ना धरे हिया
कृष्णे कन्या-दान करि कत साधे कहे कत नाना यौतुक दिया
1 पद भजन में
- पद 3भजनक्षणे कृष्ण कृष्ण बलि कान्दे घन-घन
खणे सखी सखी बलि करये रोदन
1 पद भजन में
- पद 1भजन…श्रुत हैते कार काणे
श्री-कृष्ण-नामेर स्व-गुण महिमा
केबा जाना-इते आर
बृन्दा बिपिनेर महा मधुरिमा …
1 पद भजन में
- पद 2भजनकृष्ण-रग-कृत-मानस-तापम्
लीला-प्रकटित-रुद्र-प्रतापम्
1 पद भजन में
- पद 4भजनद्वापरे नन्देर घरे कृष्ण अबतार
यशोदा उदरे जन्म बिदित संसार
1 पद भजन में
- पद 4भजनराधा-कृष्ण-चित्र एक मिश्र-गृहे छिल
पुत्र शान्त-इते शची ताहा हाते दिल
1 पद भजन में
- पद 4भजनए सुख-सम्पद-काले गोरा न भजिनु हेले
हेन पदे ना करिनु आश
श्री-कृष्ण-चैतन्यचन्द्र ठाकुर श्री-नित्यानन्द
गुण गाय बृन्दाबन दास
1 पद भजन में
- पद 3भजनकाछनि कटिर बेश शोभिछे चाञ्चर केश
बण्धे चूडा अति मनोहरे
नाटुया ठमके चले बुज बाहि पडे लोरे
त्रिबिध जीबेर ताप हरे
1 पद भजन में
- पद 1भजननृत्यत गौरचन्द्र जन-रञ्जन, नित्यानन्द बिपद-भय-भञ्जन
कञ्ज-नयन जिति नब नब खञ्जन, चाहनि मनमथ गरब हरे
झलकत दुहुं तनु कनक धराधर, नटन घटन पग धरत धरणी पर
हास मिलित मुख लयत सुधाकर, उचरि बचन जनु अमिया झरे
1 पद भजन में
- पद 2भजनकत शत मन- मथ-मद-हरे
हासि निशा-मुख चन्द्रमा चारु
कञ्ज-दल-दलि ललित लोचन
चाहनि ना राखे धैरज कारु
1 पद भजन में
- पद 2भजनकि नब भङ्गी-भरे मदन-मद-हरे
झलके निरुपम रुचि छटा
शिरीष फुल जिनि मृदुल तनु-खानि
ताहे बिपुल पुलकेर घटा
1 पद भजन में
- पद 6भजनएमन दयालु प्रभु नाहि हबे आर
ऐकान्तिक कृष्ण-भक्ति करिल प्रचार
1 पद भजन में
- पद 1भजन…श्री-गौराङ्गश् चिद्-आनन्दः
कृष्णश् चैतन्य-विग्रहः
नवद्वीप-निवासी च
जगन्नाथ-सुतस् तथा
1 पद भजन में
- पद 5भजन…विलसच्-छ्री-चतुर्-भुज
षेषादि-पार्षदोपस्य
ष्रीमद्-गरुड-वाहन
ओ लोर्द् कृष्ण, इन् योउर् स्प्लेन्दिद् फोउर्-अर्मेद् फोर्म्, योउ होल्द् थे चोन्छ्, लोतुस्, च्लुब् अन्द् दिस्च् योउ अरे वोर्स्हिपेद् ब्य् अनन्त शेष अन्द् योउर् ओथेर् अस्सोचिअतेस्, अन्द् योउ अरे चर्रिएद् ब्य् गरुड.
1 पद भजन में
- पद 1भजनष्री - कृष्ण जीया मथुरावतीर्ण
स्व-प्रेम-दानैक-नितान्त-कृत्य
नाना-सुमाधुर्य-महा-निधान
संव्यण्जितैष्वर्य-कृपा-महत्त्वा
1 पद भजन में
- पद 1भजनभाद्र-कृष्णाष्टमी-जात
प्राजापत्यर्क्ष-सम्भव
मही-मण्गल-विस्तारिन्
साधु-चित्त-प्रसादक
1 पद भजन में
- पद 2भजन…ष्री-वृन्दावन-चन्द्र हे
वृन्दावन-प्रिय ष्रीमद्
वृन्दावन-विभूषण
ओ लोर्द् कृष्ण, ओ मोओन् ओफ् वृन्दावन, ओ ओर्नमेन्त् ओफ् बेऔतिफुल् वृन्दावन, योउ अरे वेर्य् फोन्द् ओफ् थे लन्द् ओफ् वृन्दावन. रेसिदेन्चे इन् योउर् वृन्दावन ग्रेअत्ल्य् प्लेअसेस् थे हेअर्त्स् (ओफ् योउर् देवोतेएस्).