“गौर आरती” के परिणाम
439 भजन · 566 पद भजन के शब्दों में · 472 पद अर्थ में
इनमें से कोई भी शब्द वाले भजन, सारे शब्दों वाले पहले। केवल सारे शब्दों वाले भजन
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- पद 1भजननृत्यत गौरचन्द्र जन-रञ्जन, नित्यानन्द बिपद-भय-भञ्जन
कञ्ज-नयन जिति नब नब खञ्जन, चाहनि मनमथ गरब हरे
झलकत दुहुं तनु कनक धराधर, नटन घटन पग धरत धरणी पर
हास मिलित मुख लयत सुधाकर, उचरि बचन जनु अमिया झरे - पद 1अर्थसबको आनन्द देने वाले भगवान् गौरचन्द्र नाचते हैं। हर विपत्ति का भय मिटाने वाले भगवान् नित्यानन्द उनके साथ नाचते हैं। उनके कमल-नेत्र नये-नये खंजन पक्षियों को भी हरा देते हैं। उनकी सुन्दर चितवन कामदेव का गर्व हर लेती है। उनके शरीर सोने के दो पर्वतों की तरह चमकते…
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- पद 1भजनगौर नब-घन प्रेम-धारा बरिषिल
तृषित तापित जीब तिरपित भेल
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- पद 1भजनगौर सुन्दर पहुं नदीया उदय करि
भुबन भरिया प्रेम-दान
पामर पाशण्ड आदि दीन हीन क्शीण जाति
उद्धारिल दिया हरि-नाम
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- पद 1भजनजय जय महाप्रभु जय गौरचन्द्र
जय जय बिश्वम्भर करुणार सिन्धु
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- पद 1भजनस्नान करि श्री-गौराङ्ग बसिलेन दिब्यासने
डा-इने बामे निता-इ गदा-इ
अद्वैत सम्मुखे बसि मिष्टान्न पायस करे
श्रिबास योगाय धा-इ धा-इ