कबे गौर बने
कबे गौर-बने, सुरधुनी-तटे,
गीतमाला में 81 भजन हैं, जिनके रचयिता भक्तिविनोद ठाकुर हैं, जो 5 अध्यायों में सजे हैं।
81 भजन · पृष्ठ 1 / 2
कबे गौर-बने, सुरधुनी-तटे,
देखिते देखिते भुलिबो बा कबे
हेनो काले कबे बिलास मञ्जरी
पाल्य-दासी करि' ललिता सुन्दरी
चिन्तामणि-मोय राधा-कुण्ड-तट
निर्जन कुटीरे श्री राधा चरण
श्री रूप मञ्जरी कबे मधुर बचने
बरणे तडित् बास ताराबली
बृषभानु-सुता- चरण-सेबने
बृषभानु-सुता- चरण-सेवने,
श्री-कृष्ण-बिरहे राधिकार दास
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हेरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
आमि अति दिन-मति ब्रज-कुञ्जे निबसति
प्रदोष-समये श्रीबास-अङ्गने
प्रबेशिया अन्तः-पुरे नारी-गणे शान्त कोरे
धन जन देह गेह कृष्णे समर्पण
सबु मेलि' बालक-भाग बिचारि'
श्रीबास-बचन श्रबण कोरिया
प्रभुर बचन तखन शुनिया
गोराचन्देर अज्ञ पेये गृह-बासि-गण
पूर्ण-चिद्-आनन्द तुमि तोमार चित्-कण आमि
बान्धिलो माया जे दिन हो'ते
श्रीबासे कोहेन प्रभु तुँहु मोर दास
श्रीबासेर प्रति चैतन्य-प्रसाद
मृत शिशु लो'ये तबे भकत-बत्सल
नदीया-नगरे गोरा-चरित अमृत
श्री-गुरु श्री-गौरचन्द्र बृन्दाबने जुब-द्वन्द्व
बहु-जन्म-भाग्य-बशे चिन्मोय मधुर रसे
जोग जाग सब छार श्रद्धा सकलेर सार
छाडि' अन्य अभिलाष ज्ञान-कर्म-सहाबास
श्रद्धा-देबि नाम जार दुइति स्वभाब तार
रूपानुग तत्त्व-सार बुझिते अकङ्ख जाँर
रसेर आधार जिनि ताँर चित्ते रस-खनि
जेइ रति जन्मे जार सेइ मत रस तार