Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
दिखाएँ
टेक्स्ट
सोणार बरण गौर सुन्दर पाण्डुर भैगेल देह शीत भीत केन काम्पये सघन सोँअरि पूरब लेह
अर्थ

श्री गौरसुन्दर का सुनहरा शरीर सफेद और फीका पड़ गया है। क्या ठण्ड से या डर से वे इतना काँप रहे हैं? वे अपने प्रिय के ध्यान में मग्न हैं।

किछु ना कह-इ दीघ निश्वस-इ चित्रेर पुतलि पारा नयन-युगल बहि पडे जल येन मन्दाकिनी धारा
अर्थ

वे एक शब्द भी नहीं बोलते। वे लम्बी-लम्बी साँसें भरते हैं। स्तब्ध होकर वे किसी अचल चित्रित पुतले के समान दिखते हैं। उनकी आँखों से आँसू बहते हैं, जैसे आकाश-गंगा की धार।

घामे तिति गेल सब कलेबर ना जानि केमने तापे कखन सङ्गीत कखन रोदन किबा करे परलापे
अर्थ

उनका सारा शरीर पसीने से भीग जाता है। उन्हें ऐसा ज्वर कैसे चढ़ गया? कभी वे गाते हैं, कभी रोते हैं, कभी कटु विलाप करते हैं।

कहे नरहरि मोर गौर-हरि चाहये रङ्केर पारा हरि हरि बोले भुज-युग तोले मरम बुझिबे कारा
अर्थ

नरहरि कहते हैं, मेरे प्रभु गौर-हरि अभिभूत हैं। दोनों बाहें उठाकर वे "हरि! हरि!" का जाप करते हैं। उनके हृदय की बात कौन समझ सकता है?