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Nandgram Dham Vaishnava Songs · nandgramdham.org/songs

स्रस्तम् स्रस्तम् उदनिचयन्त्य्

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

स्रस्तम् स्रस्तम् उदन्स्चयन्त्य् अदिसिरह् स्यमम् निचोलस्चलम् हस्तेन स्लथ-दुर्बलेन लुलितकल्पम् वहन्ति तनुम् मुक्तर्धम् अवरुध्य वेनिम् अलस-स्पन्दे क्सिपन्ति द्र्सौ कुस्जत् पस्य ग्र्हम् प्रविस्य निभ्र्तम् सेते सखि रधिक
अर्थ

बार-बार अपने ढीले, निर्बल हाथ से सरकते हुए गहरे नीले वस्त्र के छोर को ऊपर खींचते हुए, अपने शरीर पर बिखरे हुए सारे आभूषण लिए, आधी खुली वेणी को फिर से बाँधते हुए, थकी-मंद दृष्टि से नेत्र घुमाते हुए, देखो हे सखी, राधिका कुंज से घर में प्रवेश कर अब चुपचाप लेट गई हैं।

म्लनम् उत्क्सिप्य मलम् त्रुतित-मनि-सरह् कज्जलम् बिभ्रद्-ओस्थे सन्किर्नन्गो नखन्खैर् दिसि दिसि विकिरन् घुर्निते नेत्र-पद्मे पस्य म्लनन्ग-यस्तिह् स्फुतम् अपरिचितो गोप-गोस्थिभिर् अग्रे गोस्थम् गोस्थेन्द्र-सुनुह् प्रविसति रजनौ ध्वम्सम् असदयन्त्यम्
अर्थ

मुरझाई माला को उतार फेंकते हुए, मोतियों की माला टूटी हुई, अधरों पर काजल फैला हुआ, उनके अंगों पर सर्वत्र नाखूनों के निशान, उनके कमल-नयन घूमते हुए हर दिशा में दृष्टि डालते, देखो, थकी और शिथिल देह लिए, ग्वालों की सभा में अनजाने ही प्रवेश करते हुए, गोप-राज का पुत्र रात्रि के अंत होते ही गोकुल में प्रवेश करता है।