श्री बिन्दु माधवाष्टक
यमुना के तट के वन में, लताओं की कुटिया में वे गर्वीली गोपियों के साथ प्रेम-लीलाएँ करते हैं। अपनी अमृत जैसी बाँसुरी की सुगन्धित मधुर तानों से वे गोपों और गायों को आनन्द के नशे में मतवाला कर देते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
उनकी चार भुजाओं में गदा, शंख, चक्र और शारंग धनुष हैं। उनकी कृपा-भरी तिरछी दृष्टि के अमृत की बूँदें अर्जुन पर छिड़की गई हैं। वे वह कमल-मन्दिर हैं जिसमें सनन्दन-कुमार और मौनी मुनियों के मन निवास करते हैं। उनकी कीर्ति सारे जगत् को पवित्र करती है। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
दिगीश्वर देवताओं के मुकुटों के नए रत्नों से निकलती प्रभा उनके चरण-कमलों पर चमकती है। चन्द्र-मुकुटधारी शिव और कमल से जन्मे ब्रह्मा उनके सामने झुकते हैं। उनके नेत्र करुणा के अमृत से भरी कमल की पंखुड़ियाँ हैं। वे सब शत्रुओं के समूह को टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
वे कल्प-पुष्पों की शय्या पर विश्राम करते हैं। वह शय्या सर्पराज अनन्त शेष की कुण्डली पर टिकी है, और उस कुण्डली पर क्षीरसागर की लहरों की बूँदें छिटकती हैं। उनकी कमर पर पिघले सोने जैसा चमकता वस्त्र लिपटा है। वे अपने शत्रुओं के चमकते तीखे शस्त्रों को टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
मत्स्य अवतार के रूप में इस जगत् में उतरकर और वेदों को चुराने वाले दैत्य के गर्व को कुशलता से नष्ट करके उन्होंने कमल से जन्मे ब्रह्मा को सन्तुष्ट किया। जन्म-मृत्यु के बार-बार आने वाले महासागर में डूबते दीन जीवों का वे उद्धार करते हैं। वे पक्षियों के राजा गरुड़ पर तीव्र गति से उड़ते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
कूर्म रूप प्रकट करके उन्होंने पर्वतराज मेरु को धारण किया, जिसे दैत्यों और देवताओं ने समुद्र के बीच उन पर रखा था। वराह रूप प्रकट करके उन्होंने अभिमान में चूर दैत्य हिरण्याक्ष का वध किया। उन्होंने दैत्य हिरण्यकशिपु का अन्त कर दिया। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
विरोचन के पुत्र बलि के सिर पर उन्होंने अपना चरण रखा। अपने परशु से उन्होंने पृथ्वी के असुर राजाओं का संहार किया। शिव के विशाल धनुष और अन्य शस्त्रों को अपनी बलशाली भुजाओं में लेकर उन्होंने पृथ्वी के पुत्र नरकासुर को परास्त किया। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
उन्होंने यमुना की तेज़ धारा को परास्त किया। असुरों की पत्नियों के अभिमान को उन्होंने चूर-चूर कर दिया। उनकी सेना ने कालयवन की सेना को हरा दिया। वे बलराम के छोटे भाई और गद के बड़े भाई हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।
बिन्दु-माधवाष्टक भगवान् के दस अवतारों के उस वर्णन का अनुसरण करता है, जो पंचचामर नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ में दिया गया है। वह ग्रन्थ भगवान् नृसिंह के एक भक्त ने लिखा है। जो भी इन प्रार्थनाओं को पढ़ता या जपता है, उसे दुर्लभ और कठिनाई से मिलने वाली इच्छाएँ भी प्राप्त हो जाती हैं।
इस भजन के बारे में
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- पद
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