Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री बिन्दु माधवाष्टक

श्री बिन्दु-माधवाष्टक कलिन्दजा-तटाटवी-लता-निकेतनान्तर प्रगल्भ-बल्लवी-स्फुरद्-रति-प्रसङ्ग-सङ्गतम् सुधा-रसार्द्र-वेणु-नाद-मोद-माधुरी-मद प्रमत्त-गोप-गो-व्रजं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

यमुना के तट के वन में, लताओं की कुटिया में वे गर्वीली गोपियों के साथ प्रेम-लीलाएँ करते हैं। अपनी अमृत जैसी बाँसुरी की सुगन्धित मधुर तानों से वे गोपों और गायों को आनन्द के नशे में मतवाला कर देते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

गदारि=शङ्ख-चक्र-शार्ङ्ग-भृच्-चतुष्-करं कृपा कटाक्ष-वीक्षणामृतोक्षितामरेन्द्र=नन्दनम् सनन्दनादि-मौनि-मानसारविन्द-मन्दिरं जगत्-पवित्र-कीर्ति-दं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

उनकी चार भुजाओं में गदा, शंख, चक्र और शारंग धनुष हैं। उनकी कृपा-भरी तिरछी दृष्टि के अमृत की बूँदें अर्जुन पर छिड़की गई हैं। वे वह कमल-मन्दिर हैं जिसमें सनन्दन-कुमार और मौनी मुनियों के मन निवास करते हैं। उनकी कीर्ति सारे जगत् को पवित्र करती है। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

दिग्-ईश-मौलि-नूत्न-रत्न-निःसरत्-प्रभावली विराजिताङ्घ्रि-पङ्कजं नतेन्दु-शेखराब्जजम् दया-मरन्द-तुन्दिलारविन्द-पत्र-लोचनं विरोधि-यूथ-भेदनं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

दिगीश्वर देवताओं के मुकुटों के नए रत्नों से निकलती प्रभा उनके चरण-कमलों पर चमकती है। चन्द्र-मुकुटधारी शिव और कमल से जन्मे ब्रह्मा उनके सामने झुकते हैं। उनके नेत्र करुणा के अमृत से भरी कमल की पंखुड़ियाँ हैं। वे सब शत्रुओं के समूह को टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

पयः-पयोधि-वीचिकावली-पयः-पृषन्-मिलद् भुजाङ्ग-पुङ्गवाङ्ग-कल्प-पुष्प-तल्प-शायिनम् कटी-तटी-स्फुटी-भवत्-प्रतप्त-हाटकाम्बरं निशात-कोटि-पाटनं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

वे कल्प-पुष्पों की शय्या पर विश्राम करते हैं। वह शय्या सर्पराज अनन्त शेष की कुण्डली पर टिकी है, और उस कुण्डली पर क्षीरसागर की लहरों की बूँदें छिटकती हैं। उनकी कमर पर पिघले सोने जैसा चमकता वस्त्र लिपटा है। वे अपने शत्रुओं के चमकते तीखे शस्त्रों को टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

अनुश्रवापहारकावलेप-लोप-नैपुणी पयश्चरावतार-तोषितारविन्द-सम्भवम् महा-भवाब्धि-मध्य-मग्न-दीन-लोक-तारकं विहङ्ग-राट्-तुरङ्गमं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

मत्स्य अवतार के रूप में इस जगत् में उतरकर और वेदों को चुराने वाले दैत्य के गर्व को कुशलता से नष्ट करके उन्होंने कमल से जन्मे ब्रह्मा को सन्तुष्ट किया। जन्म-मृत्यु के बार-बार आने वाले महासागर में डूबते दीन जीवों का वे उद्धार करते हैं। वे पक्षियों के राजा गरुड़ पर तीव्र गति से उड़ते हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

समुद्र-तोय-मध्य-देव-दानवोत्क्षिपद्-धरा धरेन्द्र-मूल-धारण-क्षमादि-कूर्म-विग्रहम् दुराग्रहावलिप्त-हाटकाक्ष-नाश-शूकरं हिरण्य-दानवान्तकं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

कूर्म रूप प्रकट करके उन्होंने पर्वतराज मेरु को धारण किया, जिसे दैत्यों और देवताओं ने समुद्र के बीच उन पर रखा था। वराह रूप प्रकट करके उन्होंने अभिमान में चूर दैत्य हिरण्याक्ष का वध किया। उन्होंने दैत्य हिरण्यकशिपु का अन्त कर दिया। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

विरोचनात्म-सम्भवोत्तमाङ्ग-कृत्-पद-क्रमं परश्वधोपसंहताखिलावनीश-मण्डलम् कठोर-नीलकण्ठ-कार्मुक-प्रदाऋसितादि-दोर् बलान्वित-क्षिती=सुतं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

विरोचन के पुत्र बलि के सिर पर उन्होंने अपना चरण रखा। अपने परशु से उन्होंने पृथ्वी के असुर राजाओं का संहार किया। शिव के विशाल धनुष और अन्य शस्त्रों को अपनी बलशाली भुजाओं में लेकर उन्होंने पृथ्वी के पुत्र नरकासुर को परास्त किया। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

यमानुजोदक-प्रवाह-सत्वराभिजित्वरं पुरासुराङ्गनाभिमान-भज्जितोपनायकम् स्व-मण्डलाग्र-खण्डनीय-यावनारि-मण्डलं बलानुजं गदाग्रजं भजामि बिन्दु-माधवम्
अर्थ

उन्होंने यमुना की तेज़ धारा को परास्त किया। असुरों की पत्नियों के अभिमान को उन्होंने चूर-चूर कर दिया। उनकी सेना ने कालयवन की सेना को हरा दिया। वे बलराम के छोटे भाई और गद के बड़े भाई हैं। मैं भगवान् बिन्दु-माधव का भजन करता हूँ।

प्रशस्त-पञ्च-चामराख्य-वृत्त-भेद-भासितं दशावतार-वर्णनं नृसिंह-भक्त-वर्णितम् प्रसिद्ध-बिन्दु-माधवाष्टकं पठन्ति ये नराः सु-दुर्लभं भजन्ति ते मनोरथं निरन्तरम्
अर्थ

बिन्दु-माधवाष्टक भगवान् के दस अवतारों के उस वर्णन का अनुसरण करता है, जो पंचचामर नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ में दिया गया है। वह ग्रन्थ भगवान् नृसिंह के एक भक्त ने लिखा है। जो भी इन प्रार्थनाओं को पढ़ता या जपता है, उसे दुर्लभ और कठिनाई से मिलने वाली इच्छाएँ भी प्राप्त हो जाती हैं।

इस भजन के बारे में

पद
9