Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री हरि नामाष्टक

श्री हरि-नामाष्टक श्री-केशवाच्युत मुकुन्द रथाङ्ग-पाणे गोविन्द माधव जनार्दन दानवारे नारायणामर-पते त्रि-जगन्-निवास जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे ब्रह्मा और शिव के स्वामी! हे अच्युत प्रभु! हे मुक्ति देने वाले! हे अपने हाथ में चक्र धारण करने वाले प्रभु! हे गायों, भूमि और इन्द्रियों को प्रसन्न करने वाले प्रभु! हे देवी लक्ष्मी के पति! हे भक्तों को कष्ट से बचाने वाले प्रभु! हे दानवों के शत्रु! हे भगवान् नारायण! हे देवताओं के स्वामी! हे जिनमें तीनों लोक निवास करते हैं! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्री-देव-देव मधुसूदन शार्ङ्ग-पाणे दामोदरार्णव-निकेतन कैटभारे विश्वम्भराभरण-भूषित भूमि-पाल जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे देवताओं के स्वामी! हे मधु के संहारक! हे अपने हाथ में शारंग धनुष धारण करने वाले प्रभु! हे जिनकी कमर रस्सी से बाँधी गई थी! हे सागर में निवास करने वाले प्रभु! हे कैटभ के शत्रु! हे जगत् के पालनकर्ता! हे आभूषणों से सजे प्रभु! हे पृथ्वी के रक्षक! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्री-पद्म-लोचन गदाधर पद्मनाभ पद्मेश पद्मपद पावन पद्मपाणे पीताम्बराम्बर-रुचे रुचिरावतार जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे कमल-नयन प्रभु! हे गदा धारण करने वाले प्रभु! हे कमल-नाभि वाले प्रभु! हे कमल-चरण वाले प्रभु! हे पावन करने वाले! हे कमल-हाथों वाले प्रभु! हे पीले वस्त्रों वाले प्रभु! हे सुन्दर वस्त्रों से सजे प्रभु! हे मनोहर प्रभु! हे इस जगत् में अवतरित होने वाले प्रभु! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्रीकान्त कौस्तुभ-धरार्तहराब्जपाणे विष्णो त्रि-विक्रम मही-धर धर्म-सेतो वैकुण्ठ-वास वसुधाधिप वासुदेव जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे देवी लक्ष्मी के प्रियतम! हे कौस्तुभ मणि से सुशोभित प्रभु! हे भक्तों के कष्ट हरने वाले प्रभु! हे कमल-हस्त प्रभु! हे सर्वव्यापी प्रभु! हे तीनों लोकों से भी बढ़कर प्रभु! हे पृथ्वी के पालनकर्ता! हे धर्म के सेतु! हे वैकुण्ठ में निवास करने वाले प्रभु! हे पृथ्वी के राजा! हे वसुदेव के पुत्र! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्री-नारसिंह नरकान्तक कान्त-मूर्ते लक्ष्मी-पते गरुड-वाहन शेष-शायिन् केशि-प्रणाशन सु-केश किरीट-मौले जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे भगवान् नृसिंह! हे नरकासुर का अन्त करने वाले प्रभु! हे सुन्दर रूप वाले प्रभु! हे देवी लक्ष्मी के पति! हे गरुड़ पर उड़ने वाले प्रभु! हे शेष पर शयन करने वाले प्रभु! हे केशी के संहारक! हे सुन्दर केशों वाले प्रभु! हे तेजस्वी मुकुट धारण करने वाले प्रभु! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्रीवत्स-लञ्छन सुरर्षभ शार्ङ्ग-पाणे कल्पान्त-वारिधि-विहार हरे मुरारे यज्ञेश यज्ञमय यज्ञ-भुग् आदि-देव जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे श्रीवत्स चिह्न धारण करने वाले प्रभु! हे सुरों में श्रेष्ठ! हे जिनके हाथ में शंख है! हे कल्प के अन्त में महासागर में लीला करने वाले प्रभु! हे समस्त अमंगल हरने वाले प्रभु! हे मुर के शत्रु! हे समस्त यज्ञों के स्वामी! हे यज्ञ-स्वरूप प्रभु! हे समस्त यज्ञों के भोक्ता! हे सब देवों के अग्रणी! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्री-राम रावण-रिपो रघु-वंश-केतो सीता-पते दशरथात्मज राज-सिंह सुग्रीव-मित्र मृग-वेधन-चाप-पाणे जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे यशस्वी भगवान् राम! हे रावण के शत्रु! हे रघु-वंश की ध्वजा! हे सीता के पति! हे दशरथ के पुत्र! हे राजाओं में सिंह! हे सुग्रीव के मित्र! हे हाथ में धनुष लेकर हिरण का वध करने वाले प्रभु! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

श्री-कृष्ण वृष्णि-वर यादव राधिकेश गोवर्धनोद्धरण कंस-विनाश शौरे गोपाल वेणु-धर पाण्डुसुतैक-बन्धो जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि
अर्थ

हे सर्वाकर्षक भगवान् कृष्ण! हे वृष्णियों में श्रेष्ठ! हे यदु के वंशज! हे राधिका के स्वामी! हे गोवर्धन पर्वत उठाने वाले! हे कंस के संहारक! हे राजा शूरसेन के वंशज! हे गायों के रक्षक! हे बाँसुरी धारण करने वाले प्रभु! हे पाण्डवों के मित्र! हे जीभ, इन मधुर अक्षरों का सदा जप करो।

इत्य् अष्टकं भगवतः सततं नरो यो नामान्तिकं पठति नित्यम् अनन्य-चेताः विष्णोः परम् पदम् उपैति पुनर् न जातु मातुः पयोधर-रसं पिबतीह सत्यम्
अर्थ

जो मनुष्य अटल एकाग्रता से परमेश्वर के पवित्र नामों की महिमा वाले इन आठ श्लोकों का नित्य जप या पाठ करता है, वह भगवान् विष्णु के परम धाम को प्राप्त होता है। वह कभी फिर अपनी माता के स्तनों का दूध नहीं पिएगा। यह सत्य है।

इस भजन के बारे में

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।