नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
श्री कुलशेखर आलवार प्रणाम
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अक्षर
100%
गाते समय
घुष्यते यस्य नगरे
रङ्ग-यात्रा दिने दिने
तम् अहं शिरसा वन्दे
राजानं कुलशेखरम्
अर्थ
जिनकी राजधानी में हर दिन "श्रीरंगम् की यात्रा!" की पुकार गूँजती थी, उन राजा कुलशेखर की मैं सिर झुकाकर वन्दना करता हूँ।
कुम्भे पुनर्वसौ जातं
केरले चोल-पट्टणे
कौस्तुभांशं धराधीशं
कुलशेखरम् आश्रये
अर्थ
मैं पृथ्वी के स्वामी कुलशेखर की शरण लेता हूँ। वे भगवान् की कौस्तुभ मणि के अंश हैं और केरल के कोलपट्टण में कुम्भ मास में पुनर्वसु नक्षत्र के समय जन्मे थे।
इस भजन के बारे में
- ग्रन्थ
- प्रणाम मन्त्र
- भाव
- पद
- 2