Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री राधाकुण्ड प्रणाम

यथा राधा प्रिया विष्णोस् तस्याः कुण्डं प्रियं तथा सर्व-गोपीषु सैवैका विष्णोर् अत्यन्त-वल्लभा
अर्थ

जैसे श्री राधा भगवान् विष्णु को प्रिय हैं, वैसे ही उनका कुण्ड भी उन्हें प्रिय है। सब गोपियों में केवल वे ही भगवान् की सबसे अधिक प्यारी हैं।

कृष्णस्योच्चैः प्रणय-वसतिः प्रेयसीभ्यो 'पि राधा कुण्डं चास्या मुनिभिर् अभितस् तादृग् एव व्यधायि यत् प्रेष्ठैर् अप्य् अलम् असुलभं किं पुनर् भक्ति-भाजां तत् प्रेमेदं सकृद् अपि सरः स्नातुर् आविष्करोति
अर्थ

श्रीकृष्ण की सब प्रियतमाओं में भी श्री राधा उनके प्रेम का सबसे ऊँचा आश्रय हैं। मुनियों ने उनके कुण्ड को भी हर प्रकार से वैसा ही प्रिय बताया है। जो प्रेम उनके सबसे प्यारे भक्तों को भी आसानी से नहीं मिलता, साधारण भक्तों की तो बात ही क्या, वही प्रेम यह सरोवर एक बार स्नान करने वाले के हृदय में भी प्रकट कर देता है।

इस भजन के बारे में

पद
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