Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
आन कथा आन ब्यथा नाहि जेन जाञ तथा तोमार चरण स्मृति-साझे अबिरत अबिकल तूया गुण कल-कल गाइ जेन सतेर समाझे
अर्थ

जहाँ सांसारिक बातें और सांसारिक पीड़ाएँ हों, वहाँ मैं कभी न जाऊँ। तुम्हारे चरणों का स्मरण ही मेरे हृदय को सजाए। भक्तों की सभा में मैं बिना रुके, ठीक से, तुम्हारे गुणों का मधुर गान करता रहूँ।

अन्य-ब्रत अन्य-दान नाहि करोँ बस्तु-ज्ञान अन्य-सेबा अन्य-देब-पूजा हा हा कृष्ण बलि बलि बेडाँअ आनन्द करि मने मोर नहे जेन दूजा
अर्थ

दूसरे व्रत, दूसरे दान, दूसरों की सेवा और दूसरे देवताओं की पूजा को मैं कोई महत्व नहीं दूँगा। 'हा कृष्ण, हा कृष्ण' पुकारते हुए मैं आनन्द से घूमता फिरूँगा, और मेरे मन में कोई दूसरा भाव न रहे।

जीबने मरणे गति राधा-कृष्ण प्राण-पति दूँहार पिरीति-रस-सूखे जूगल भजन जाँरा प्रेमानन्द भासे तारा एइ कथा रहु मोर बूके
अर्थ

जीवन और मृत्यु में मेरी एक ही गति है, राधा-कृष्ण, जो मेरे प्राणनाथ हैं, और उन दोनों के प्रेम-रस का सुख। जो लोग युगल का भजन करते हैं, वे प्रेमानन्द में तैरने लगते हैं। यह बात मेरे हृदय में सदा बनी रहे।

जूगल-चरण-सेबा एइ धन मोरे दिबा जूगलेते मनेर पिरीति जूगल-किशोर-रूप काम-रति गण-भूप मने रहु ओ लीला-किरीति
अर्थ

युगल-चरणों की सेवा का यह धन मुझे दे दो, और मेरे मन में उन दोनों के प्रति प्रेम बना रहे। युगल किशोर का वह रूप, जो कामदेव और रति से भी श्रेष्ठ है, उनकी वे दिव्य लीलाएँ मेरे मन में सदा बनी रहें।

दशनेते तृण धरि हा हा किशोर-किशोरी चराणब्जे निबेदन करि ब्रज-राज-कूमार-श्याम बृषभानू कूमारी नाम श्री-राधिका-नाम मनोहारी
अर्थ

दाँतों में तिनका पकड़कर, हे किशोर-किशोरी! हे व्रजराज-कुमार श्याम, हे वृषभानु-कुमारी मनोहारिणी श्री राधिके! मैं तुम्हारे चरण-कमलों में यह विनती करता हूँ।

कनक-केतकी राइ श्याम मरकत काइ दरप-दरप करु चूर नट-बर-शिखरिनी नटिनीर शिरोमणी दूँहु-गुणे दूँहुन्-मन झूर
अर्थ

राधिका स्वर्ण-केतकी के समान हैं, और श्याम नीलमणि के समान हैं। उनका सौन्दर्य सबके अभिमान को चूर कर देता है। श्याम नर्तकों में श्रेष्ठ हैं, और राधिका नर्तकियों में शिरोमणि हैं। दोनों एक-दूसरे के गुणों से मुग्ध हो जाते हैं।

श्रीमूख सून्दर बर हेम नील कान्तिधर भाव भूषण करु शोभा नील पीत-बासधर गौरी श्याम मनोहर अन्तरेर भावे दूँहु लोभा
अर्थ

उनके सुन्दर मुख सोने और नीली कान्ति से चमकते हैं, और भाव ही उनकी शोभा के आभूषण हैं। नीले और पीले वस्त्र पहने गौरी राधा और श्याम कृष्ण मन को हर लेते हैं, और मन के भीतर के भाव से एक-दूसरे पर लुभाए रहते हैं।

आभरण मनिमय प्रति अङ्गे अभिनय तछू पाय दीन नरोत्तम दास निशि दिन गुण गाँअ परम आनन्द पाँअ मने मोर एइ अभिलाष
अर्थ

रत्नों के आभूषणों से सजे उनके हर अंग में मनोहर भाव-भंगिमा है। दीन नरोत्तम दास उनके चरणों में है। दिन-रात उनके गुण गाकर परम आनन्द पाऊँ, यही मेरे मन की अभिलाषा है।