Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

वारय माधवम् उद्यद् अनङ्गम्

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

वारय माधव-मुद-वदनाङ्गम् स्पृशति यथायं न सखि मद्-अङ्गम्
अर्थ

हे सखी, आनन्द से दमकते मुख वाले माधव को रोको, कहीं वे मेरे शरीर का स्पर्श न कर बैठें।

किम् अयं रचयति नयन-तरङ्गम् कैरविणी न हि भजति पतङ्गम्
अर्थ

वे मुझ पर ये लहराती हुई चितवनें क्यों डालते हैं? सच तो यह है कि श्वेत कुमुदिनी कभी सूर्य की ओर नहीं मुड़ती।

कम्पि-करान् मम पतति लवङ्गम् त्वम् अपि तथापि न मुञ्चसि रङ्गम्
अर्थ

मेरा लौंग-पुष्प का आभूषण काँपकर गिर पड़ता है, फिर भी तुम अपनी क्रीड़ा नहीं छोड़ते।

किम् अपि सनातन-धर्मम् अभङ्गम् न परिहरिष्ये हृदि कृत-सङ्गम्
अर्थ

यह तो मानो कोई सनातन, अटूट नियम ही है, मैं अपने हृदय में बन चुके इस बन्धन को कभी नहीं त्यागूँगी।