अभिषेके गौरचन्देर आनन्द अपार
भगवान् गौरचन्द्र के अभिषेक में आनन्द का अपार सागर उमड़ पड़ा। भक्तगण इसी तरह प्रभु की उस लीला का वर्णन करते हैं।
सिर से पैर तक उनके शरीर के रोएँ खड़े हो गए। उन्होंने सुनहरे सिंह की अयाल या कदम्ब के फूल की कलियों को भी जीत लिया।
उनका हृदय भावों के आनन्द से भरा है। गद्गद् कण्ठ से वे टूटे-फूटे शब्द बोलते हैं। वे सबकी इच्छाएँ पूरी करते हैं।
शची के पुत्र भगवान् गौर सब जीवित प्राणियों के प्राण-धन हैं। उनके चन्द्रमा जैसे मुख की कथा सुनकर हर हृदय को शीतल आनन्द मिलता है।
जिन सबको भगवान् गौरचन्द्र की लीलाओं पर विश्वास है, उनका दुःखी कृष्ण दास सेवक है। वह उनके सेवकों का भी सेवक है।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- कृष्ण दास
- पद
- 5