Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

लीलामृत रस सार तार शत शत धार

लीलामृत रस सार तार शत शत धार दश दिके बहे याहा हैते से चैतन्य्-लीला हय सरोबर अक्षय मनो-हंस छाड-ओ ताहाते
अर्थ

भगवान कृष्ण की लीलाओं के सबसे मधुर अमृत की सैकड़ों-सैकड़ों उफनती नदियाँ दसों दिशाओं से बहकर भगवान चैतन्य की लीलाओं के नित्य सरोवर में आ मिलती हैं। हे भक्तों के मन-रूपी हंसो, कृपा करके उसी सरोवर की ओर उड़ चलो।

टेक
भक्त-गण शुन मोर चैतन्य-बदन तोमार सबार श्री-चरण करि अङ्ग बिभूषण करो किछु एक निबेदन
अर्थ

हे भक्तो, कृपा करके भगवान चैतन्य के विषय में मेरी बातें सुनिए। आप सब भगवान कृष्ण के सुन्दर चरणों को अपने शरीर का आभूषण बना लीजिए। यही मेरा आपसे निवेदन है।

कृष्ण-भक्ति सिद्धान्त-गण प्रफुल्लित पद्म-बन ताहा मधु कर आस्वादन प्रेम-रसे कुमुद्-बने प्रफुल्लित रात्रि-दिने ताहे चरह मनो-भृङ्ग-गण
अर्थ

हे भक्तों के मन-रूपी भौंरो, भगवान कृष्ण की भक्ति के सिद्धान्तों के खिले हुए कमल-वन का मधुर अमृत कृपा करके चखो। दिन-रात भगवान कृष्ण के प्रति दिव्य प्रेम के खिले हुए कमलों के वन में मँडराते रहो।

नाना-भाबे भक्त-गण हंस चक्रबाक-गण याते सबे करेन बिहार कृष्ण-केलि मृणाल याहा पा-इ सर्ब-काल भक्त करये आहार
अर्थ

हे भक्तों के हंसो और चक्रवाक पक्षियो, उन कमल-वनों में अनेक प्रकार के विहार का आनन्द लो। भगवान कृष्ण की लीलाओं के कमल-नालों के बीच सदा बने रहो। वहाँ आनन्द लो।

से-इ सरोबरे याञा हंस चक्रबाक हैञा सदा ताते करह बिलास खण्डिबे सकल दुःख पा-इबे परम सुख अनायसे कहे कृष्ण-दास
अर्थ

हे भक्तों के हंसो और चक्रवाक पक्षियो, भगवान चैतन्य की लीलाओं के उस सरोवर पर जाओ। वहाँ सदा लीलाओं का आनन्द लो। तुम्हारे सारे दुःख टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे। तुम्हें परम सुख मिलेगा। कृष्ण दास पूरे विश्वास से ये बातें कहता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
कृष्ण दास
पद
5