Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
बरज-बिपिने जमुना-कूले मञ्च मनोहर शोभित फुले
अर्थ

व्रज के वन में यमुना के तट पर फूलों से सुशोभित एक मनोहर मंच है।

बनस्पति-लता तुषये आङ्खि तद्-उपरि कत डाकये पाखी
अर्थ

वहाँ के वृक्ष और लताएँ आँखों को सुहाती हैं, और उनके ऊपर कितने ही पक्षी बोल रहे हैं।

मलय-अनिल बहये धीरे अलि-कुल मधु लोभेये फीरे
अर्थ

मलय पवन धीरे-धीरे बह रही है। मधु के लोभ में भ्रमरों के समूह उड़ते-फिरते हैं।

बासन्तीर राक उरुप तदा कौमुदी बितोरे आदरे सदा
अर्थ

वसन्त का पूर्ण चन्द्रमा और तारे उस समय शोभा से चमक रहे हैं, और बड़े स्नेह से चाँदनी बिखेर रहे हैं।

एमत समये रसिक-बर आरम्भिलो रास मुरली-धर
अर्थ

उसी समय रस के आस्वादन में सबसे श्रेष्ठ, मुरलीधारी श्रीकृष्ण ने रास-नृत्य आरम्भ किया।

शत-कोती-गोपी माझेते होरि राधा-सह नाचे आनन्द कोरि'
अर्थ

सैकड़ों-करोड़ों गोपियों के मध्य श्रीकृष्ण राधा के साथ आनन्दपूर्वक नृत्य करने लगे।

माधब-मोहिनी गाइया गीत हरिलो सकल जगत चित
अर्थ

मधुर गीत गाकर, माधव-मोहिनी श्री राधा ने सारे जगत के हृदय को मोहित कर लिया।

स्ताबर-जाङ्गम मोहिला सती हाराओलो चन्द्रा- बलीर मति
अर्थ

वे साध्वी राधा चर और अचर, सभी को मोहित कर लेती हैं। वे चन्द्रावली का गर्व भी दूर कर देती हैं।

मथिता बरज- किशोर-मन अन्तरित होय राधा तखन
अर्थ

व्रज के किशोर श्रीकृष्ण के मन को मथकर राधा तभी अन्तर्धान हो जाती हैं।

भकतिबिनोद परमाद गणे रास भाङ्गल (अजि) राधा-बिहने
अर्थ

भक्तिविनोद देखते हैं कि आज एक बड़ी विपत्ति आ गई है: राधा की अनुपस्थिति में रास-नृत्य टूट गया है।