Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

भजो पतित उद्धारण श्री गौर हरि

भजो पतित उद्धारण श्री गौर हरि श्री गौर हरि नवद्वीप बिहारी
अर्थ

पतितों का उद्धार करने वाले श्रीगौरहरि का भजन करो, नवद्वीप में विहार करने वाले श्रीगौरहरि का।

एसो एसो महाप्रभु कोरि निवेदन एबे दीन दासेर् गृहे कोरो आगमन
अर्थ

"आइए, आइए महाप्रभु, मैं निवेदन करता हूँ: अब इस दीन दास के घर पधारिए।"

प्रभु लोये भक्त-गण कोरिलेन गमन आनन्देते हुलु दिच्छे जोतो नारी-गण
अर्थ

प्रभु भक्तों को साथ लेकर चल पड़े, और सारी स्त्रियाँ आनन्द से हुलु-ध्वनि करने लगीं।

अद्वैत गृहिणी आर शान्तिपुर नारी हुलु हुलु ध्वनि देय् गोरा मुख हेरि
अर्थ

अद्वैत की गृहिणी और शान्तिपुर की स्त्रियाँ गोरा का मुख देखकर हुलु-हुलु ध्वनि करने लगीं।

बोसिते आसन दिला रत्न-सिंहासन सुशीतल जले कोइला पाद-प्रक्षालन
अर्थ

बैठने के लिए उन्हें रत्न-सिंहासन दिया गया और शीतल जल से उनके चरण धोए गए।

श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु कोरो अवधान भोग-मन्दिरे प्रभु कोरोहो पयाण
अर्थ

"हे श्रीकृष्ण चैतन्य प्रभु, ध्यान दीजिए: प्रभु, भोग-मन्दिर में पधारिए।"

बामेते अद्वैत प्रभु दक्षिणे निताइ मध्यासने बोसिलेन चैतन्य गोसाइ
अर्थ

बाईं ओर अद्वैत प्रभु और दाईं ओर निताई बैठे, और बीच के आसन पर चैतन्य गोसाईं बैठे।

चौषट्टि महान्त आर द्वादश गोपाल छोय् चक्रवर्ती आर अष्ट कविराज सघृत शाल्यन्न व्यञ्जन दिया सारि सारि भोगेर उपोरे दिलो तुलसी-मञ्जरी
अर्थ

चौंसठ महान्त, बारह गोपाल, छह चक्रवर्ती और आठ कविराज भी वहाँ थे। घी के साथ बढ़िया चावल और व्यंजन पंक्ति-पर-पंक्ति परोसे गए, और भोग के ऊपर तुलसी-मंजरी रखी गई।

शाक् शुक्ता मोचा दिलो आर-ओ दिलो भाजा आनन्दे भोजन कोरेन् नदीयार राजा
अर्थ

साग, शुक्ता, मोचा (केले का फूल) और तले हुए व्यंजन भी परोसे गए, और नदिया के राजा ने आनन्द से भोजन किया।

गङ्गा-जल तुलसी दिया कोइलो निवेदन आनन्दे भोजन कोरेन् शचीर नन्दन
अर्थ

गंगाजल में तुलसी डालकर अर्पित किया गया, और शचीनन्दन ने आनन्द से भोजन किया।

दधि दुग्ध घृत छाना नाना उपहार आनन्दे भोजन कोरेन् शचीर कुमार
अर्थ

दही, दूध, घी, छेना और तरह-तरह के उपहार: शची के लाल ने आनन्द से भोजन किया।

माल्पुया सर-भाजा आर लुचि पुरी आनन्दे भोजन कोरेन नदीया-बिहारी
अर्थ

मालपुआ, सर-भाजा (तली हुई मलाई), लूची और पूरी: नदिया-विहारी ने आनन्द से भोजन किया।

नाहि जानि परिपाटि ना जानि रन्धन शुका रुखा एक मुठि कोरोहो भोजन
अर्थ

"मैं न विधि जानता हूँ, न रसोई बनाना जानता हूँ। यह मुट्ठी भर रूखा-सूखा भोजन ग्रहण कीजिए।"

भोजनेर अवशेषे कोहिते ना पारि सुवर्ण-भृङ्गारे दिलो सुवासित वारि
अर्थ

भोजन के अन्त का वर्णन मैं नहीं कर सकता। सोने की झारी में सुगन्धित जल लाया गया।

भोजन कोरिया प्रभु कोइलेन आचमन सुवर्ण-खडिकाय कोरेन् दन्त-शोधन
अर्थ

भोजन करके प्रभु ने आचमन किया और सोने की खरिका से दाँत साफ़ किए।

आचमन कोरिया प्रभु बोसिलेन सिंहासने कर्पूर ताम्बूल योगाय प्रिय भक्त-गणे
अर्थ

आचमन करके प्रभु सिंहासन पर बैठे, और प्रिय भक्त कपूर वाला पान लाए।

ताम्बूल खाइया प्रभुर पालङ्के शयन गोविन्द दास कोरे चरण सेवन
अर्थ

पान खाकर प्रभु पलंग पर लेट गए, और गोविन्द दास उनके चरणों की सेवा करने लगे।

फुलेर चौयारी घर फुलेर खेयारी फुलेर रत्न-सिंहासन चाँदोया मशारी
अर्थ

फूलों का मण्डप, फूलों की शय्या, फूलों का रत्न-सिंहासन, और फूलों का चँदोवा और मसहरी।

फुलेर पापडि प्रभुर उडे पडे गाय तार मध्ये महाप्रभु सुखे निद्रा याय
अर्थ

फूलों की पंखुड़ियाँ उड़कर प्रभु के अंगों पर गिरती हैं, और उनके बीच महाप्रभु सुख से सो जाते हैं।

श्री कृष्ण चैतन्य प्रभुर दासेर अनुदास सेवा अभिलाष मागे नरोत्तम दास
अर्थ

श्रीकृष्ण चैतन्य प्रभु के दासों का अनुदास नरोत्तम दास सेवा की अभिलाषा माँगता है।

इस भजन के बारे में

पद
20