Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बिरजर परे शुद्ध परब्योम धाम

बिरजर परे शुद्ध-परब्योम-धाम तद्-उपरि श्री-गोकुल-बृन्दारण्य-नाम
अर्थ

विरजा नदी के उस पार शुद्ध परव्योम धाम है, और उस आकाश के भी ऊपर श्री गोकुल वृन्दावन नामक लोक है।

बृन्दाबन-चिन्तामणि चिद्-आनन्द-रत्न-खनि चिन्मोय अपूर्ब-दरशन तहि माझे चमत्कार कृष्ण-बनस्पति-सार नीलमणि तमाल जेमोन
अर्थ

वृन्दावन चिन्तामणि से बना है। वह चिद्-आनन्द के रत्नों से भरा है। वहाँ सब कुछ चिन्मय है, देखने में अत्यन्त अद्भुत है। उस धाम के मध्य में अद्भुत श्रीकृष्ण हैं, जो एक तेजोमय नीलमणि तमाल वृक्ष के समान हैं।

तहे एक स्वर्णमोयी लता सर्ब-धाम-जयी उठियाछे परम-पाबनी ह्लादिनी-शक्तिर सार महा-भाब नाम जार त्रिभूबन-मोहन-मोहिनी
अर्थ

उस वृक्ष पर एक सुनहरी लता उगी है, जो सब धामों में श्रेष्ठ और परम पवित्र है। यह लता भगवान की ह्लादिनी शक्ति का सार है, और इसका नाम 'महाभाव' (प्रेम की चरम अवस्था) है। यह वह लता है जो तीनों लोकों को मोहित करने वाले श्रीकृष्ण को भी मोहित कर लेती है।

राधा-नामे परिचित तुषिया गोबिन्द-चित बिराजये परम आनन्दे सेइ लता-पत्र-फुल ललितादि-सखी-कुल सबे मिलि' बृखे दृढ बन्धे
अर्थ

'राधा' नाम से जानी जाने वाली यह लता गोविन्द के हृदय को प्रसन्न करती हुई परम आनन्द में सुशोभित रहती है। इस लता के पत्ते और फूल, जो ललिता आदि सखियाँ हैं, सब मिलकर उस तमाल वृक्ष को दृढ़ता से आलिंगन में बाँधे रहते हैं।

लतार परशे प्रफुल्ल तमाल लता छारि' नाहि रहे कोनो काल
अर्थ

उस लता के स्पर्श से तमाल वृक्ष खिल उठता है। वह लता उस वृक्ष को छोड़कर कभी दूर नहीं रहती।

तमाल छारिया लता नाहि बाञ्छे से लता मिलन सदा-काल जाचे
अर्थ

वह लता तमाल वृक्ष को छोड़ना कभी नहीं चाहती। वह सदा उसी वृक्ष के साथ मिलन की कामना करती है।

भकतिबिनोद मिलन दोँहार ना चाहे कखोन बिना किछु आर
अर्थ

भक्तिविनोद उन दोनों (राधा-कृष्ण) के मिलन की ही कामना करते हैं। इसके अतिरिक्त वे कभी कुछ और नहीं चाहते।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतावली
पद
7