बिरजर परे शुद्ध परब्योम धाम
विरजा नदी के उस पार शुद्ध परव्योम धाम है, और उस आकाश के भी ऊपर श्री गोकुल वृन्दावन नामक लोक है।
वृन्दावन चिन्तामणि से बना है। वह चिद्-आनन्द के रत्नों से भरा है। वहाँ सब कुछ चिन्मय है, देखने में अत्यन्त अद्भुत है। उस धाम के मध्य में अद्भुत श्रीकृष्ण हैं, जो एक तेजोमय नीलमणि तमाल वृक्ष के समान हैं।
उस वृक्ष पर एक सुनहरी लता उगी है, जो सब धामों में श्रेष्ठ और परम पवित्र है। यह लता भगवान की ह्लादिनी शक्ति का सार है, और इसका नाम 'महाभाव' (प्रेम की चरम अवस्था) है। यह वह लता है जो तीनों लोकों को मोहित करने वाले श्रीकृष्ण को भी मोहित कर लेती है।
'राधा' नाम से जानी जाने वाली यह लता गोविन्द के हृदय को प्रसन्न करती हुई परम आनन्द में सुशोभित रहती है। इस लता के पत्ते और फूल, जो ललिता आदि सखियाँ हैं, सब मिलकर उस तमाल वृक्ष को दृढ़ता से आलिंगन में बाँधे रहते हैं।
उस लता के स्पर्श से तमाल वृक्ष खिल उठता है। वह लता उस वृक्ष को छोड़कर कभी दूर नहीं रहती।
वह लता तमाल वृक्ष को छोड़ना कभी नहीं चाहती। वह सदा उसी वृक्ष के साथ मिलन की कामना करती है।
भक्तिविनोद उन दोनों (राधा-कृष्ण) के मिलन की ही कामना करते हैं। इसके अतिरिक्त वे कभी कुछ और नहीं चाहते।