देव हरे भव कारुण्य शाली
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
हे प्रभु हरि, करुणा करो। तुम्हारी सखी का हृदय तुम्हारे तीखे कटाक्ष-बाण से बिंधा है, उसका शरीर दुबला हो गया है, फिर भी वह किसी तरह जीवित है।
उसकी अचानक हुई बीमारी का कारण कोई नहीं जान पाया, यद्यपि मंत्रों और औषधियों के ढेर लगा दिए गए। उसका पूरा परिवार उसके लिए शोक कर रहा है, निरंतर रोने से सबकी आँखें लाल और सूजी हुई हैं।
उसके हृदय में निरंतर तीव्र ज्वर उठता है, पसीने की बूंदें चमकते मोतियों-सी फूट पड़ती हैं, उसका शरीर ठंडी भूमि पर निश्चल पड़ा है, अब वह बिना किसी उपाय के असहाय होकर डूबती जा रही है।
हे माधव, तुम जो गोकुलवासियों को निर्भयता प्रदान करने वाले उस महायज्ञ के व्रत में दीक्षित हो, हाय, हे सनातन, इतने गुणों से भरी यह बालिका ऐसी भयंकर दशा भोगने की भला कैसे पात्र हो सकती है?