दोयाल् निताइ चैतन्य
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7 रिकॉर्डिंग"दयाल निताई चैतन्य" कहते हुए नाच रे मेरे मन! नाच रे मेरे मन, नाच रे मेरे मन!
(ऐसा दयालु और कोई नहीं है, मार खाकर भी वे प्रेम देते हैं।) (हे मन,) तेरे अपराध दूर हो जाएँगे, तुझे प्रेम का धन मिलेगा। (उनके नाम में अपराध का कोई विचार नहीं है।) (तब) कृष्ण-नाम में रुचि जगेगी, तेरा बंधन कट जाएगा।
(हे मन, कृष्ण-नाम में तेरा अनुराग होगा।) (तब) जीव का जीवन सहज ही सफल हो जाएगा। (हे मन, कृष्ण-प्रेम के बिना जीवन व्यर्थ है।) (अंत में) तू वृंदावन में राधा-श्याम का दर्शन पाएगा। (यह तब होगा जब गौर की कृपा होगी।)
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।