Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दुर्लभ मानब जन्म

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दुर्लभ मानब-जन्म लभिया सोंसारे कृष्ण ना भजिनु दुःख कहिबो काहारे
अर्थ

दुर्लभ मानव-जन्म पाकर भी इस संसार में मैंने कृष्ण की भक्ति नहीं की, अपना यह दुख अब किसे कहूँ?

सोंसार सोंसार को'रे मिछे गेलो काल लाभ ना कोइलो किछु घटिलो जञ्जाल
अर्थ

गृहस्थी, गृहस्थी करते-करते मेरा समय व्यर्थ बीत गया, मुझे कुछ लाभ नहीं हुआ, बस झंझट ही झंझट मिला।

किसेर सोंसार एइ छायाबाजि प्राय इहाते ममता कोरि' बृथ दिन जाय
अर्थ

यह कैसा संसार है, यह तो जादूगर के खेल के समान है। इसमें ममता करते-करते मेरे दिन व्यर्थ बीत रहे हैं।

ए देहो पतन हो'ले कि रो'बे आमार केहो सुख नाहि दिबे पुत्र-परिबार
अर्थ

जब यह शरीर गिर जाएगा, तब मेरा क्या रह जाएगा? न पुत्र, न परिवार, कोई भी मुझे सुख नहीं देगा।

गर्दभेर मत आमि कोरि परिश्रम का'र लागि एतो कोरि ना घुचिलो भ्रम
अर्थ

मैं गधे के समान कठोर परिश्रम करता हूँ, यह सब किसके लिए करता हूँ? फिर भी मेरा भ्रम दूर नहीं होता।

दिन जाय मिछ काजे निशा निद्रा-बशे नाहि भाबि मरण निकटे आछे बो'से
अर्थ

मेरे दिन व्यर्थ काम में और रातें नींद के वश में बीत जाती हैं। मुझे यह ख़याल ही नहीं आता कि मृत्यु पास ही बैठी है।

भालो मन्द खाइ हेरि परि चिन्ता-हीन नाहि भाबि ए देहो छारिबो कोन दीन
अर्थ

अच्छा-बुरा जो मिलता है खाता हूँ, देखता हूँ, पहनता हूँ, बिना किसी चिंता के। मुझे यह पता ही नहीं कि किसी दिन यह शरीर छूट जाएगा।

देहो-गेहो-कलत्रादि-चिन्ता अबिरत जागिछे हृदोये मोर बुद्धि कोरि' हत
अर्थ

शरीर, घर, पत्नी आदि की चिंता निरंतर मेरे हृदय में जागती रहती है, जिसने मेरी बुद्धि को नष्ट कर दिया है।

हाय हाय नाहि भाबि अनित्य ए सब जीबन बिगते कोथा रोहिबे बैभब
अर्थ

हाय, हाय! मैंने यह सोचा ही नहीं कि यह सब अनित्य है। जीवन समाप्त होने पर मेरा यह वैभव कहाँ रह जाएगा?

श्मशाने शरीर मम पोरिया रोहिबे बिहङ्ग-पतङ्ग ताय बिहार कोरिबे
अर्थ

श्मशान में मेरा यह शरीर पड़ा रहेगा, और पक्षी-कीड़े उस पर अपनी क्रीड़ा करेंगे।

कुक्कुर शृगल सब आनन्दित हो'ये महोत्सब कोरिबे आमार देहो लो'ये
अर्थ

कुत्ते और गीदड़ सब आनंदित होकर मेरे इस शरीर को लेकर महोत्सव मनाएँगे।

जे देहेर एइ गति ता'र अनुगत सोंसार-बैभब आर बन्धु-जन जत
अर्थ

जो गति इस शरीर की है, वही गति मेरे संसार के वैभव और सभी मित्रों-परिजनों की भी होगी।

अत एब माया-मोह छारि बुद्धिमान नित्य-तत्त्व कृष्ण-भक्ति कोरुन सन्धान
अर्थ

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति माया के इस मोह को त्यागकर नित्य सत्य कृष्ण की भक्ति की साधना करता है।

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।