Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
एक्-बार् भाबो मने आशा-बशे भ्रमि' हेथा, पा'बे कि सुख जीबने के तुमि कोथाय् छिले, कि कोरिते हेथा एले किबा काज् कोरे' गेले, जा'बे कोथा शरीर-पतने
अर्थ

एक बार अपने हृदय में विचार करो। सांसारिक इच्छाओं के वशीभूत होकर इस जीवन में भटकते हुए, तुम्हें क्या सुख मिलता है? तुम कौन हो? तुम कहाँ से आए हो? तुम यहाँ कैसे आए? तुम यहाँ से कैसे जाओगे? जब यह शरीर गिर जाएगा, तब तुम कहाँ जाओगे?

केनो सुख दुःख भोय, अहम्ता-ममता-मोय तुच्छ जय-परजय, क्रोध हिंसा द्वेष अन्य-जने भकतिबिनोद कोय, कोरि गोरा-पदाश्रोय चिद्-आनन्द-रस-मोय, हओ राधा कृष्ण-नाम-गाने
अर्थ

तुम सुख, दुःख, भय, तुच्छ जय-पराजय, क्रोध, हिंसा और दूसरों के प्रति द्वेष का अनुभव क्यों करते हो? ये सब 'मैं' और 'मेरा' के भौतिक भाव से उत्पन्न होते हैं। भक्तिविनोद कहते हैं: गौरांग के चरणों की शरण लो और राधा-कृष्ण के नाम गाते हुए दिव्य आनन्द-रस से भर जाओ।