Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

एलो रे गौराङ्गचान्द प्रेमे एलोथेलो

Read in English

दिखाएँ
टेक्स्ट
एलो रे गौराङ्गचान्द प्रेमे एलोथेलो निताइ-अद्वैत-सङ्गे गोद्रुमे पशिलो
अर्थ

प्रेम से अभिभूत होकर, गौरांगचंद नित्यानन्द और अद्वैत के साथ गोद्रुम में प्रवेश कर गए।

सङ्कीर्तन-रसे मेते नाम बिलाइलो नामेर हाटे एसे प्रेमे जगत् भासाइलो
अर्थ

संकीर्तन के रस में मतवाले होकर उन्होंने नाम को खुले हाथों बाँट दिया। नाम की इस हाट में आकर उन्होंने सारे संसार को प्रेम में तैरा दिया।

गोद्रुम-बासीर आज दुःख दूरे गेलो भक्त-बृन्द-सङ्गे आसि' हाट जगैलो
अर्थ

आज गोद्रुम के निवासियों के दुःख दूर हो गए हैं। अपने भक्तों के साथ आकर, प्रभु ने नाम की हाट को जागृत कर दिया है।

नदीया भ्रमिते गोरा एलो नामेर हाटे गौर एलो हाटे सङ्गे निताइ एलो हाटे
अर्थ

नदिया में विचरण करते हुए, गौरांग नाम की हाट में पहुँचे। जब गौरांग उस हाट में पहुँचे, तो नित्यानन्द भी उनके साथ उस हाट में पहुँचे।

नाचे मातोयारा निताइ गोद्रुमेर माठे जगत् माताय निताइ प्रेमेर मालसाटे
अर्थ

नित्यानन्द उन्मत्त होकर गोद्रुम के मैदानों और चरागाहों में नाचते हैं। प्रेम में अपनी बाहों को ठोकते हुए, नित्यानन्द सारे जगत को उन्मत्त कर देते हैं।

(तोरा देखे जा'रे) अद्वैतादि भक्त-बृन्द नाचे घाटे घाटे पलाय दुरन्त कलि पोर्डिया बिभ्राटे
अर्थ

(सब आओ और देखो!) अद्वैत के नेतृत्व में भक्तगण घाट-घाट पर नृत्य करते हैं। भीषण संकट में पड़कर, दुर्दांत कलियुग भाग खड़ा हुआ है।

कि सुखे भासिलो जीब गोराचन्देर नाटे देखिया शुनिया पाशण्डीर बुके फाटे
अर्थ

हर जीव आनन्द में क्यों तैरने लगा? गौरांगचाँद का नृत्य देखकर और सुनकर पाषण्डियों के भी हृदय प्रेम से फट गए।