एलो रे गौराङ्गचान्द प्रेमे एलोथेलो
प्रेम से अभिभूत होकर, गौरांगचंद नित्यानन्द और अद्वैत के साथ गोद्रुम में प्रवेश कर गए।
संकीर्तन के रस में मतवाले होकर उन्होंने नाम को खुले हाथों बाँट दिया। नाम की इस हाट में आकर उन्होंने सारे संसार को प्रेम में तैरा दिया।
आज गोद्रुम के निवासियों के दुःख दूर हो गए हैं। अपने भक्तों के साथ आकर, प्रभु ने नाम की हाट को जागृत कर दिया है।
नदिया में विचरण करते हुए, गौरांग नाम की हाट में पहुँचे। जब गौरांग उस हाट में पहुँचे, तो नित्यानन्द भी उनके साथ उस हाट में पहुँचे।
नित्यानन्द उन्मत्त होकर गोद्रुम के मैदानों और चरागाहों में नाचते हैं। प्रेम में अपनी बाहों को ठोकते हुए, नित्यानन्द सारे जगत को उन्मत्त कर देते हैं।
(सब आओ और देखो!) अद्वैत के नेतृत्व में भक्तगण घाट-घाट पर नृत्य करते हैं। भीषण संकट में पड़कर, दुर्दांत कलियुग भाग खड़ा हुआ है।
हर जीव आनन्द में क्यों तैरने लगा? गौरांगचाँद का नृत्य देखकर और सुनकर पाषण्डियों के भी हृदय प्रेम से फट गए।