'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
प्रार्थना (नरोत्तम दास ठाकुर) से।
लालसा का एक ही गीत प्रार्थना के मुख्य भाग में लालसा वाले अंश को आरंभ करता है। यह पुस्तक के उन कई खंडों में पहला है जो यही शीर्षक अलग-अलग, अधिक विशेष रूपों में रखते हैं, जैसे स्वाभीष्ट लालसा, साधक देहोचित लालसा और अन्य। इनमें से हर खंड भक्त की आशा के एक अलग लक्ष्य को लेता है।
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