Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
गौराङ्ग पतित-पाबन तुया नाम कलि-जीब यत आछिल कृत-पातकी दे-ओलि सबे निज-ठाम
अर्थ

हे गौरांग, आपका नाम पतित-पावन है। कलियुग के सभी पापियों को आप अपने ही धाम में शरण देते हैं।

आ-चण्डाल अबधि तोहारि गुणे कान्दये प्रेम-पुलके नाहि ओर हरि-नाम-सुधा-रसे जग-जन पूरल दिन रजनी रहु भोर
अर्थ

चाण्डालों तक सभी लोग आपके प्रेम में रोते हैं। उनके शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं। आपके प्रति उनके प्रेम की कोई सीमा नहीं है। संसार के लोग हरि-नाम के अमृत में डूबे रहते हैं। रात-दिन वे प्रेम-भाव में डूबे रहते हैं।

बिद्या कुल धन मद यद आछिल बिपद छाडिया तोहरि गुण गाय ना देखो पाषण्ड जन सभा-इ उत्तम मन सङ्कीर्तने गडागडि याय
अर्थ

विद्या, कुल और धन के अभिमान की विपत्ति को त्यागकर सभी आपके गुणों का गान करते हैं। कहीं भी कोई पाषण्डी दिखाई नहीं देता। सबका हृदय साधु हो गया है। संकीर्तन में भाव-विभोर होकर सब धरती पर लोटते हैं।

यदि बा आछये केह अशेष पापेर देह ना माने ना शुने गोरा-गुण बल्लभ-दासेर कथा मरमे मरम ब्यथा मुखे तार दे-ओ कालि चूण
अर्थ

यदि किसी के शरीर में अब भी पाप शेष हैं, तो उसने गौर प्रभु की महिमा न सुनी होगी, न उसका सम्मान किया होगा। वल्लभ दास कहते हैं, ऐसे व्यक्ति के हृदय में गहरी पीड़ा होती है। ऐसे व्यक्ति के मुख में काली राख भर जाती है।