गौराङ्ग पतित पाबन तुया नाम
हे गौरांग, आपका नाम पतित-पावन है। कलियुग के सभी पापियों को आप अपने ही धाम में शरण देते हैं।
चाण्डालों तक सभी लोग आपके प्रेम में रोते हैं। उनके शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं। आपके प्रति उनके प्रेम की कोई सीमा नहीं है। संसार के लोग हरि-नाम के अमृत में डूबे रहते हैं। रात-दिन वे प्रेम-भाव में डूबे रहते हैं।
विद्या, कुल और धन के अभिमान की विपत्ति को त्यागकर सभी आपके गुणों का गान करते हैं। कहीं भी कोई पाषण्डी दिखाई नहीं देता। सबका हृदय साधु हो गया है। संकीर्तन में भाव-विभोर होकर सब धरती पर लोटते हैं।
यदि किसी के शरीर में अब भी पाप शेष हैं, तो उसने गौर प्रभु की महिमा न सुनी होगी, न उसका सम्मान किया होगा। वल्लभ दास कहते हैं, ऐसे व्यक्ति के हृदय में गहरी पीड़ा होती है। ऐसे व्यक्ति के मुख में काली राख भर जाती है।