Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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गौराङ्गेर दुटि पद, जार् धन सम्पद, से जाने भकति-रस-सार् गौराङ्गेर मधुर-लीला, जार् कर्णे प्रवेशिला, हृदोय निर्मल भेलो तार्
अर्थ

गौरांग के दो चरण जिसका धन-सम्पत्ति हैं, वही भक्ति-रस का सार जानता है। गौरांग की मधुर लीला जिसके कानों में प्रवेश कर गई, उसका हृदय निर्मल हो जाता है।

जे गौराङ्गेर नाम लोय्, तार होय् प्रेमोदोय्, तारे मुइ जाइ बोलिहारि गौराङ्ग-गुणेते झुरे, नित्य-लीला तारे स्फुरे, से जन भकति-अधिकारी
अर्थ

जो गौरांग का नाम लेता है, उसके हृदय में प्रेम का उदय होता है, मैं उस पर बलिहारी जाता हूँ। गौरांग के गुण सुनकर जो रो पड़ता है, उसके हृदय में राधा-कृष्ण की नित्य-लीला प्रकट हो जाती है, ऐसा व्यक्ति ही भक्ति का अधिकारी है।

गौराङ्गेर सङ्गि-गणे, नित्य-सिद्ध कोरि' माने, से जाय् ब्रजेन्द्र-सुत-पाश् श्री-गौड-मण्डल-भूमि, जेबा जाने चिन्तामणि, तार होय् ब्रज-भूमे बास्
अर्थ

जो गौरांग के सहचरों को नित्य-सिद्ध मानता है, वह व्रजेन्द्र-सुत के पास पहुँच जाता है। जो श्री गौड़-मण्डल भूमि को चिन्तामणि के समान जानता है, वह वास्तव में व्रज-भूमि में ही निवास करता है।

गौर-प्रेम-रसार्णवे, से तरङ्गे जेबा डुबे, से राधा-माधव-अन्तरङ्ग गृहे बा वनेते थाके, 'हा गौराङ्ग' बो'ले डाके, नरोत्तम मागे तार सङ्ग
अर्थ

गौर-प्रेम के रस-सागर की लहरों में जो डूब जाता है, वह राधा-माधव का अन्तरंग सेवक बन जाता है। वह घर में रहे या वन में, जो 'हा गौरांग!' कहकर पुकारता है, नरोत्तम उसी का संग माँगते हैं।

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।