गौराङ्गेर दुटि पद
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9 रिकॉर्डिंगगौरांग के दो चरण जिसका धन-सम्पत्ति हैं, वही भक्ति-रस का सार जानता है। गौरांग की मधुर लीला जिसके कानों में प्रवेश कर गई, उसका हृदय निर्मल हो जाता है।
जो गौरांग का नाम लेता है, उसके हृदय में प्रेम का उदय होता है, मैं उस पर बलिहारी जाता हूँ। गौरांग के गुण सुनकर जो रो पड़ता है, उसके हृदय में राधा-कृष्ण की नित्य-लीला प्रकट हो जाती है, ऐसा व्यक्ति ही भक्ति का अधिकारी है।
जो गौरांग के सहचरों को नित्य-सिद्ध मानता है, वह व्रजेन्द्र-सुत के पास पहुँच जाता है। जो श्री गौड़-मण्डल भूमि को चिन्तामणि के समान जानता है, वह वास्तव में व्रज-भूमि में ही निवास करता है।
गौर-प्रेम के रस-सागर की लहरों में जो डूब जाता है, वह राधा-माधव का अन्तरंग सेवक बन जाता है। वह घर में रहे या वन में, जो 'हा गौरांग!' कहकर पुकारता है, नरोत्तम उसी का संग माँगते हैं।
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।