Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जगन्नाथ सुत महाप्रभु बिश्वम्भर

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जगन्नाथ-सुत महाप्रभु बिश्वम्भर मायापुर-शशी नबद्वीप-सुधाकर
अर्थ

हे चैतन्य महाप्रभु, हे जगन्नाथ मिश्र के पुत्र (जगन्नाथ-सुत), हे महाप्रभु, हे विश्व के पालक (विश्वम्भर), हे मायापुर के चन्द्रमा (मायापुर-शशी), हे नवद्वीप के अमृत-चन्द्र (नवद्वीप-सुधाकर)!

शची-सुत गौर-हरि निमाइ-सुन्दर राधा-भाब-कान्ति-आच्छादित नट-बर
अर्थ

हे शची के पुत्र (शची-सुत), हे गौरवर्ण कृष्ण (गौर-हरि), हे सुंदर निमाई (निमाई-सुंदर), हे राधा के प्रेम-भाव की कांति से आच्छादित प्रभु (राधा-भाव-कान्ति-आच्छादित), हे नृत्य में सर्वश्रेष्ठ (नटवर)!

नामानन्द चपल बालक मातृ-भक्त ब्रह्माण्ड-बदन तर्की कौतुकानुरक्त
अर्थ

हे नाम में आनन्द पाने वाले प्रभु (नामानन्द), हे चंचल बालक (चपल-बालक), हे अपनी माता के भक्त प्रभु (मातृ-भक्त), हे ब्रह्माण्ड को अपने मुख में दिखाने वाले प्रभु (ब्रह्माण्ड-वदन), हे श्रेष्ठ तार्किक (तर्की), हे क्रीड़ाप्रिय प्रभु (कौतुकानुरक्त)!

बिद्यार्थि-उडुप चौर-द्वयेर मोहन तैर्थिक-सर्बस्व ग्राम्य-बालिका-क्रीडन
अर्थ

हे विद्वानों के चन्द्रमा (विद्यार्थी-उडुप), हे दो चोरों को मोहित करने वाले प्रभु (चौर-द्वयेर-मोहन), हे तीर्थयात्री के सर्वस्व (तीर्थिक-सर्वस्व), हे गाँव की बालिकाओं को छेड़ने वाले बालक (ग्राम्य-बालिका-क्रीड़न)!

लक्ष्मी प्रति बोर-दाता उद्धत बालक श्री-शचीर पति-पुत्र-शोक-निबारक
अर्थ

हे देवी लक्ष्मी को महान वरदान देने वाले प्रभु (लक्ष्मी-प्रति-वर-दाता), हे उद्दंड बालक (उद्धत-बालक), हे शची के पति और पुत्र के वियोग का शोक दूर करने वाले प्रभु (श्री-शचीर-पति-पुत्र-शोक-निवारक)!

लक्ष्मी-पति पूर्ब-देश-सर्ब-क्लेश-हर दिग्बिजयि-दर्प-हारी बिष्णुप्रियेश्वर
अर्थ

हे लक्ष्मी के पति (लक्ष्मी-पति), हे पूर्वी बंगाल की समस्त पीड़ाओं को दूर करने वाले प्रभु (पूर्व-देश-सर्व-क्लेश-हर), हे दिग्विजयी पंडित के अभिमान को दूर करने वाले प्रभु (दिग्विजयी-दर्प-हारी), हे विष्णुप्रिया के स्वामी (विष्णुप्रियेश्वर)!

आर्ज-धर्म-पाल पितृ-गया-पिण्ड-दाता पुरी-शिष्य मध्वाचार्ज-सम्प्रदाय-पाता
अर्थ

हे सच्चे धर्म के रक्षक (आर्य-धर्म-पाल), हे गया में अपने पिता के लिए पिंड-दान करने वाले प्रभु (पितृ-गया-पिंड-दाता), हे ईश्वर पुरी के शिष्य (पुरी-शिष्य), हे मध्वाचार्य के सम्प्रदाय के रक्षक (मध्वाचार्य-सम्प्रदाय-पाता)!

कृष्ण-नामोन्मत्त कृष्ण-तत्त्व-अध्यापक नाम-सङ्कीर्तन-जुग-धर्म-प्रबर्तक
अर्थ

हे कृष्ण-नाम में उन्मत्त प्रभु (कृष्ण-नामोन्मत्त), हे कृष्ण-तत्त्व के शिक्षक (कृष्ण-तत्त्वाध्यापक), हे नाम-संकीर्तन नामक युग-धर्म का प्रचार करने वाले प्रभु (नाम-संकीर्तन-युग-धर्म-प्रवर्तक)!

अद्वैत-बान्धब श्रीनिबास-गृह-धन नित्यानन्द-प्राण गदाधरेर जीबन
अर्थ

हे अद्वैत के मित्र (अद्वैत-बान्धव), हे श्रीवास के घर के धन (श्रीनिवास-गृह-धन), हे नित्यानन्द के प्राण (नित्यानन्द-प्राण), हे गदाधर के जीवन (गदाधर-जीवन)!

अन्तर्द्वीप-शशधर सीमन्त-बिजोय गोद्रुम-बिहारी मध्यद्वीप-लिलाश्रोय
अर्थ

हे अन्तर्द्वीप के चन्द्रमा (अन्तर्द्वीप-शशधर), हे सीमन्तद्वीप की महिमा (सीमन्त-विजय), हे गोद्रुम में लीला करने वाले प्रभु (गोद्रुम-विहारी), हे मध्यद्वीप में लीला के आश्रय (मध्यद्वीप-लीलाश्रय)!

कोलद्वीप-पति ऋतुद्वीप-महेश्वर जह्नु-मोदद्रुम-रुद्रद्वीपेर ईश्वर
अर्थ

हे कोलद्वीप के स्वामी (कोलद्वीप-पति), हे ऋतुद्वीप के महेश्वर (ऋतुद्वीप-महेश्वर), हे जह्नुद्वीप, मोदद्रुमद्वीप और रुद्रद्वीप के ईश्वर (जह्नु-मोदद्रुम-रुद्रद्वीपेश्वर)!

नवखण्द-रङ्गनाथ जाह्नबी-जीबन जगाइ-माधाइ-आदि-दुर्बृत्त-तारण
अर्थ

हे नवखण्ड (नवद्वीप) के रंगनाथ (नवखण्ड-रंगनाथ), हे माता गंगा के जीवन (जाह्नवी-जीवन), हे जगाई-माधाई आदि पापियों के उद्धारक (जगाई-माधाई-आदि-दुर्वृत्त-तारण)!

नगर-कीर्तन-सिंह काजी-उद्धरण शुद्ध-नाम-प्रचारक भक्तार्ति-हरण
अर्थ

हे नगर-कीर्तन के सिंह (नगर-कीर्तन-सिंह), हे काज़ी के उद्धारक (काज़ी-उद्धरण), हे शुद्ध नाम के प्रचारक (शुद्ध-नाम-प्रचारक), हे भक्तों की पीड़ा हरने वाले प्रभु (भक्तार्ति-हरण)!

नारायणी-कृपा-सिन्धु जीबेर नियन्ता अधम-पडुया-दण्डी भक्तदोष-हन्ता
अर्थ

हे नारायणी पर कृपा के सागर (नारायणी-कृपा-सिन्धु), हे समस्त जीवों के नियन्ता (जीवेर-नियन्ता), हे अधम विद्यार्थियों को दंड देने वाले प्रभु (अधम-पड़ुया-दण्डी), हे भक्तों के दोष मिटाने वाले प्रभु (भक्त-दोष-हन्ता)!

श्री-कृष्ण-चैतन्यचन्द्र भारती-तारण परिब्राज-शिरोमणि उत्कल-पाबन
अर्थ

हे श्री कृष्ण चैतन्यचन्द्र, हे केशव भारती के उद्धारक (भारती-तारण), हे परिव्राजक-संन्यासियों के शिरोमणि (परिव्राज-शिरोमणि), हे उत्कल (उड़ीसा) को पावन करने वाले प्रभु (उत्कल-पावन)!

अम्बु-लिङ्ग-भूबनेश-कपोतेश-पति खीर-चोर-गोपाल-दर्शन-सुखी जति
अर्थ

हे अम्बुलिंग, भुवनेश्वर और कपोतेश्वर के स्वामी (अम्बुलिंग-भुवनेश-कपोतेश-पति), हे क्षीरचोर-गोपाल के दर्शन से प्रसन्न होने वाले प्रभु (क्षीरचोर-गोपाल-दर्शन-सुखी), हे संन्यासियों में सर्वश्रेष्ठ (यति)!

निर्दण्डि-सन्न्यासी सार्बभौम-कृपामोय स्वानन्द-आस्वादानन्दी सर्ब-सुखाश्रोय
अर्थ

हे वह प्रभु जिनका संन्यास-दण्ड तोड़ा गया (निर्दण्डी-संन्यासी), हे सार्वभौम पर कृपा करने वाले प्रभु (सार्वभौम-कृपामय), हे अपने ही दिव्य आनंद का आस्वादन करने वाले प्रभु (स्वानन्दास्वादानन्दी), हे समस्त सुख के आश्रय (सर्व-सुखाश्रय)!

पुरट-सुन्दर बासुदेव-त्राण-कर्ता रामानन्द-सखा भट्ट-कुल-क्लेश-हर्ता
अर्थ

हे सुवर्ण-सुंदर प्रभु (पुरट-सुन्दर), हे वासुदेव के उद्धारक (वासुदेव-त्राण-कर्ता), हे रामानन्द के सखा (रामानन्द-सखा), हे भट्ट परिवार के समस्त कष्ट दूर करने वाले प्रभु (भट्ट-कुल-क्लेश-हर्ता)!

बौद्ध-जैन-मायाबादि-कुतर्क-खण्डन दखिण-पाबन भक्ति-ग्रन्थौद्धरण
अर्थ

हे बौद्धों, जैनों और मायावादियों के मिथ्या तर्कों को खंडित करने वाले प्रभु (बौद्ध-जैन-मायावादि-कुतर्क-खण्डन), हे दक्षिण प्रदेशों को पावन करने वाले प्रभु (दक्षिण-पावन), हे भक्ति-ग्रंथों का उद्धार करने वाले प्रभु (भक्ति-ग्रन्थोद्धरण)!

आलाल-दर्शनानन्दी रथाग्र-नर्तक गजपति-त्राण देबानन्द-उद्धारक
अर्थ

हे आलालनाथ के दर्शन से आनंदित प्रभु (आलाल-दर्शनानन्दी), हे रथ के आगे नृत्य करने वाले प्रभु (रथाग्र-नर्तक), हे महाराज प्रतापरुद्र के उद्धारक (गजपति-त्राण), हे देवानन्द के उद्धारक (देवानन्द-उद्धारक)!

कुलिया-प्रकाशे दुष्ट पडुयार त्राण रूप-सनातन-बन्धु सर्ब-जीब-प्राण
अर्थ

हे कुलिया-ग्राम में प्रकट होकर दुष्ट विद्यार्थियों का उद्धार करने वाले प्रभु (कुलिया-प्रकाशे दुष्ट पड़ुयार त्राण), हे रूप और सनातन गोस्वामी के मित्र (रूप-सनातन-बान्धव), हे समस्त जीवों के प्राण (सर्व-जीव-प्राण)!

बृन्दाबनानन्द-मूर्ति बलभद्र-सङ्गी जबन-उद्धारी भट्ट-बल्लभेर रङ्गी
अर्थ

हे वृन्दावन के आनंद-स्वरूप प्रभु (वृन्दावनानन्द-मूर्ति), हे बलभद्र के सखा (बलभद्र-संगी), हे यवनों के उद्धारक (यवन-उद्धारी), हे वल्लभ भट्ट के प्रेम से आनंदित होने वाले प्रभु (भट्ट-वल्लभेर-रंगी)!

काशी-बासि-सन्न्यासी-उद्धारी प्रेम-दाता मर्कट-बैरागी-दण्डी आ-चण्डाल-त्राता
अर्थ

हे काशी के संन्यासियों के उद्धारक (काशी-वासी-संन्यासी-उद्धारी), हे दिव्य प्रेम के दाता (प्रेम-दाता), हे बंदर जैसे मिथ्या वैरागियों को दंड देने वाले प्रभु (मर्कट-वैरागी-दण्डी), हे चांडाल तक सबका उद्धार करने वाले प्रभु (आचांडाल-त्राता)!

भक्तेर गौरब-कारी भक्त-प्राण-धन हरिदास-रघुनाथ-स्वरूप-जीबन
अर्थ

हे भक्तों का सम्मान करने वाले प्रभु (भक्तेर-गौरव-कारी), हे भक्तों के प्राण और धन (भक्त-प्राण-धन), हे हरिदास, रघुनाथ दास और स्वरूप दामोदर के जीवन (हरिदास-रघुनाथ-स्वरूप-जीवन)!

नदीया-नागरे निताइ नेचे' नेचे गाय रे भकतिबिनोद ता'र पडे राङ्गा-पाय रे
अर्थ

नदिया के नगरों में नित्यानन्द नाचते-नाचते ये नाम गाते हैं। भक्तिविनोद उनके लाल-लाल चरणों में गिर पड़ते हैं।