जशोमती स्तन्य पायी श्री नन्द नन्दन
हे यशोदा के स्तन का दूध पीने वाले शिशु (यशोमती-स्तन्य-पायी), हे नन्द के पुत्र (श्री नन्द-नन्दन), हे नीलमणि-कान्ति वाले प्रभु (इन्द्रनील-मणि), हे व्रज के लोगों के जीवन (व्रज-जनेर-जीवन)!
हे गोकुल में पूतना राक्षसी का वध करने वाले प्रभु (श्री गोकुल-निशाचरी-पूतना-घातन), हे तृणावर्त असुर के संहारक (दुष्ट-तृणावर्त-हन्ता), हे छकड़े को तोड़ने वाले प्रभु (शकट-भञ्जन)!
हे मक्खन के चोर (नवनीत-चोर), हे दही चुराने में कुशल बालक (दधि-हरण-कुशल), हे यमल-अर्जुन वृक्षों को तोड़ने वाले प्रभु (यमलार्जुन-भञ्जी), हे गौओं, भूमि और इन्द्रियों को आनंद देने वाले प्रभु (गोविन्द), हे गौओं के रक्षक (गोपाल)!
हे उदर में रस्सी से बंधे हुए प्रभु (दामोदर), हे वृन्दावन में गौओं और बछड़ों के रक्षक (वृन्दावन-गो-वत्स-राखाल), हे वत्सासुर के संहारक (वत्सासुरान्तक), हे समस्त अशुभ को हरने वाले प्रभु (हरि), हे अपने भक्तों के रक्षक (निज-जन-पाल)!
हे बकासुर के शत्रु (बक-शत्रु), हे अघासुर के संहारक (अघ-हन्ता), हे ब्रह्मा को मोहित करने वाले प्रभु (ब्रह्म-विमोहन), हे धेनुकासुर के नाशक (धेनुक-नाशन), हे सर्वाकर्षक प्रभु (कृष्ण), हे कालिया के दमनकर्ता (कालिय-दमन)!
हे पीत वस्त्र धारण करने वाले प्रभु (पीताम्बर), हे मयूर-पंख धारण करने वाले प्रभु (शिखी-पिच्छ-धारी), हे मुरली धारण करने वाले प्रभु (वेणु-धर), हे भाण्डीरवन में लीला करने वाले प्रभु (भाण्डीर-कानन-लील), हे दावानल को निगलने वाले प्रभु (दावानल-हर)!
हे नर्तकों में सर्वश्रेष्ठ (नटवर), हे गुफाओं में विचरण करने वाले प्रभु (गुहा-चर), हे शरद ऋतु में लीला करने वाले प्रभु (शरद-बिहारी), हे गोपियों के प्रियतम (वल्लभी-वल्लभ), हे दिव्य और क्रीड़ाप्रिय भगवान (देव), हे गोपियों के वस्त्र चुराने वाले प्रभु (गोपी-वस्त्र-हारी)!
हे यज्ञ-पत्नियों पर करुणा के सागर (यज्ञ-पत्नी-गण-प्रति करुणार सिन्धु), हे गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले प्रभु (गोवर्धन-धृक), हे लक्ष्मी के पति (माधव), हे व्रज-निवासियों के मित्र (व्रज-वासी-बन्धु)!
हे इन्द्र के अभिमान को दूर करने वाले प्रभु (इन्द्र-दर्प-हारी), हे नन्द महाराज के रक्षक (नन्द-रक्षिता), हे मुक्ति देने वाले प्रभु (मुकुन्द), हे ग्वालों के प्रियतम (श्री गोप-वल्लभ), हे रासलीला का आनंद लेने वाले प्रभु (रास-क्रीड़), हे पूर्ण आनंद से युक्त प्रभु (पूर्णानन्द)!
हे श्री राधा के प्रियतम (श्री राधा-वल्लभ), हे राधा के पति (राधा-माधव), हे सुंदर प्रभु (सुन्दर), हे ललिता, विशाखा आदि सखियों के प्राणों से भी प्रिय स्वामी (ललिता-विशाखा-आदि-सखी-प्राणेश्वर)!
हे नए वर्षा-मेघ की कांति वाले प्रभु (नव-जलधर-कान्ति), हे कामदेव को भी मोहित करने वाले प्रभु (मदन-मोहन), हे वनमाला धारण करने वाले प्रभु (वन-माली), हे मुस्कुराते मुख वाले प्रभु (स्मेर-मुख), हे गोपियों के प्राण-धन (गोपी-प्राण-धन)!
हे नृत्य करते समय तीन स्थानों पर मुड़ने वाले प्रभु (त्रिभंगी), हे मुरली धारण करने वाले प्रभु (मुरली-धर), हे यमुना के तट पर लीला करने वाले नायक (यामुन-नागर), हे राधा-कुण्ड पर लीला करने वाले प्रभु (राधा-कुण्ड-रंग-नेता), हे रस के सागर (रसेर सागर)!
हे चन्द्रावली के प्राणों से भी प्रिय स्वामी (चन्द्रावली-प्राण-नाथ), हे क्रीड़ाप्रिय प्रभु (कौतुकाभिलाषी), हे राधा को ईर्ष्यालु और रुष्ट करने वाले रसिक प्रभु (राधा-मान-सुलम्पट), हे राधा से मिलने के प्रयासी प्रभु (मिलन-प्रयासी)!
हे मानस-गंगा का वरदान देने वाले प्रभु (मानस-गंगार दानी), हे फूलों के चोर (प्रसून-तस्कर), हे गोपियों को छेड़ने वाले रसिक प्रभु (गोपी-सह हठ-कारी), हे व्रज के वनों के स्वामी (व्रज-वनेश्वर)!
हे गोकुल की संपत्ति (गोकुल-सम्पदा), हे गोपों के दुःख दूर करने वाले प्रभु (गोप-दुःख-निवारण), हे दुष्टों का दमन करने वाले प्रभु (दुर्मद-दमन), हे भक्तों की पीड़ा हरने वाले प्रभु (भक्त-सन्ताप-हरण)!
हे विद्याधर सुदर्शन के उद्धारक (सुदर्शन-मोचन), हे शंखचूड़ के संहारक (श्री शंखचूड़ान्तक), हे बलराम के छोटे भाई (रामानुज), हे व्रज के श्याम चन्द्रमा (श्यामचन्द्र), हे मुरली बजाने वाले प्रभु (मुरली-वादक)!
हे गोपियों के गीत सुनने वाले प्रभु (गोपी-गीत-श्रोता), हे मधु असुर के संहारक (मधुसूदन), हे मुर असुर के शत्रु (मुरारि), हे अरिष्टासुर के संहारक (अरिष्ट-घातक), हे राधा-कुण्ड आदि स्थानों में लीला करने वाले प्रभु (राधा-कुण्डादि-बिहारी)!
हे व्योमासुर के संहारक (व्योमान्तक), हे कमल-नेत्र प्रभु (पद्म-नेत्र), हे केशी असुर के संहारक (केशि-निसूदन), हे क्रीड़ाप्रिय प्रभु (रंग-क्रीड़), हे कंस के संहारक (कंस-हन्ता), हे कंस के मल्लों के संहारक (मल्ल-प्रहरण)!
हे वसुदेव के पुत्र (वसुदेव-सुत), हे वृष्णि वंश की कीर्ति की ध्वजा (वृष्णि-वंश-कीर्ति-ध्वज), हे दीनों के स्वामी (दीन-नाथ), हे मथुरा के स्वामी (मथुरेश), हे देवकी के गर्भ से जन्मे प्रभु (देवकी-गर्भ-ज)!
हे कुब्जा पर कृपा करने वाले प्रभु (कुब्जा-कृपामय), हे सर्वव्यापी प्रभु (विष्णु), हे शूरसेन के वंशज (शौरि), हे समस्त जीवों के आश्रय (नारायण), हे द्वारका के स्वामी (द्वारकेश), हे नरकासुर के संहारक (नरक-घ्न), हे यदुवंश के वंशज (श्री यदु-नन्दन)!
हे श्री रुक्मिणी के प्रियतम (श्री रुक्मिणी-कान्त), हे सत्या के पति (सत्या-पति), हे देवताओं के रक्षक (सुर-पाल), हे पाण्डवों के सम्बन्धी (पाण्डव-बान्धव), हे शिशुपाल आदि असुरों के लिए काल-स्वरूप प्रभु (शिशुपालादिर काल)!
हे जगत के स्वामी (जगदीश), हे भक्तों की पीड़ा हरने वाले प्रभु (जनार्दन), हे ब्रह्मा और शिव के स्वामी (केशव), हे भक्तों को कष्ट से बचाने वाले प्रभु (आर्त-त्राण), हे समस्त अवतारों के बीज (सर्वावतार-बीज), हे ब्रह्माण्डों के मूल कारण (विश्व-निदान)!
हे माया के स्वामी (मायेश्वर), हे योग के स्वामी (योगेश्वर), हे ब्रह्म-तेज को धारण करने वाले प्रभु (ब्रह्म-तेज-धार), हे समस्त आत्माओं की आत्मा (सर्वात्मात्मा), हे परम स्वामी (प्रभु), हे प्रकृति से परे प्रभु (प्रकृति-पार)!
हे पतितों के पावनकर्ता (पतित-पावन), हे ब्रह्माण्डों के स्वामी (जगन्नाथ), हे सबके नियन्ता (सर्वेश्वर), हे वृन्दावन के चन्द्रमा (वृन्दावन-चन्द्र), हे समस्त रसों के आकर (सर्व-रसाकर)!
नगर-नगर में चैतन्य महाप्रभु ये नाम गाते हैं। भक्तिविनोद उनके चरणों में गिर पड़ते हैं।