Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कलहान्तरिता

सीदति सखि मम हृदयम् अधीरम् यद् अभजम् इह न हि गोकुल-वीरम्
अर्थ

हे सखी, मेरा अधीर हृदय व्यथा में डूबा जा रहा है, क्योंकि मैंने यहाँ गोकुल के वीर का आलिंगन नहीं किया।

नाकर्णयम् अति-सुहृद्-उपदेशम् माधव-चाटु-पटलम् अपि लेशम्
अर्थ

मैंने अपनी परम प्रिय सखियों की सद्भावना से दी गई सलाह भी तनिक नहीं सुनी, न ही माधव के अपने सुलहकारी वचन ही सुने।

नालोकयम् अर्पितम् उरु-हारम् प्रणमन्तम् च दयितम् अनुवारम्
अर्थ

मैंने उसके भेंट किए भव्य हार की ओर देखा तक नहीं, न ही बार-बार मेरे सामने झुककर प्रणाम करते अपने प्रियतम की ओर।

हन्त सनातन-गुणम् अभियान्तम् किम् अधारयम् अहम् उरसि न कान्तम्
अर्थ

हाय, जब वह मेरी ओर आ रहा था, तब मैंने अपने नित्य, अटल गुणों से युक्त प्रियतम को अपने वक्ष से क्यों न लगा लिया?

इस भजन के बारे में

पद
4