Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मृगमद चन्दन कोरे कोरि सखीगण

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

मृगमद चन्दन, कोरे कोरि सखीगण, वरिषये फुल गन्ध राजे श्रम-जल बिन्दु बिन्दु, शोभा कोरे मुख इन्दु, अधरे मुरली नाहि बाजे
अर्थ

कस्तूरी और चन्दन तैयार करके सखियाँ उन दोनों पर सुगन्धित फूल बरसाती हैं; पसीने की बूँद-बूँद कृष्ण के चन्द्र-मुख की शोभा बढ़ा रही है, अब उनके अधरों पर वंशी नहीं बज रही।

हास्य विलास रस, सरस मधुर भाष, नरोत्तम मनोरथ भोरु दुहुक विचित्र वेश, कुसुम रचित केश, लोचन मोहन लीला कोरु
अर्थ

उनकी हँसी, उनका चंचल रसमय भाव, उनकी मधुर, रसीली बातें, बस यही नरोत्तम के हृदय की कामना है; उन दोनों की अद्भुत वेशभूषा, फूलों से सजे केश, और नेत्रों को मोह लेने वाली उनकी लीलाएँ।