Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पुलके चरित गाय सुखे गडागडि याय

पुलके चरित गाय सुखे गडागडि याय देख रे चैतन्य अबतार बैकुँठ-नायक हरि द्विज-रूपे अबतारि सङ्कीर्तने करेन बिहार
अर्थ

देखो रे, चैतन्य अवतार को देखो। वे चरित्र गाते हैं तो रोमांच से उनके रोएँ खड़े हो जाते हैं, और आनन्द में भरकर वे भूमि पर लोटने लगते हैं। वे वैकुण्ठ के नायक स्वयं भगवान् हरि हैं, जो ब्राह्मण के रूप में अवतरित होकर संकीर्तन में विहार करते हैं।

कनक जिनिया कान्ति श्री-बिग्रह शोभा भान्ति आ-जानु-लम्बित भुज साजे सन्न्यासीर रूप धरि आपन रस बिह्वल ना जानि केमन सुखे नाचे
अर्थ

उनका श्रीविग्रह सुन्दर और शोभायमान है, उनकी कान्ति सोने को भी जीत लेती है और उनकी लम्बी भुजाएँ घुटनों तक पहुँचती हैं। संन्यासी का रूप धारण करके वे अपने ही रस के आस्वादन में विह्वल हैं, और किस सुख में वे नाच रहे हैं, यह मैं नहीं जानता।

जय श्री-गौरसुन्दर करुँआर सिन्धु-मय जय बृन्दाबन-राय रे नबद्वीपे पुरन्दर बृन्दाबन पामरे चरँअ-कमले देह छाय रे
अर्थ

हे श्रीगौरसुन्दर, हे करुणा के सागर, आपकी जय हो। हे वृन्दावन के राजा, आपकी जय हो। हे नवद्वीप के स्वामी, मुझ पापी वृन्दावन दास को अपने चरण-कमलों की छाया दीजिए।

इस भजन के बारे में

पद
3