Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधा भजने जदि मति नाहि भेला

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टेक्स्ट
राधा-भजने जदि मति नाहि भेला कृष्ण-भजन तब अकारण गेला
अर्थ

यदि तुम्हारा मन श्री राधा की भक्ति में नहीं लगता, तो तुम्हारी कृष्ण-भक्ति व्यर्थ चली जाती है।

आतप रोहित सूरय नाहि जानि राधा-बिरहित माधब नाहि मानि
अर्थ

मैं जानता हूँ कि सूर्य कभी सूर्य-प्रकाश के बिना नहीं होता। उसी प्रकार मैं जानता हूँ कि श्रीकृष्ण कभी राधा के बिना नहीं होते।

केबल माधब पूजये स अज्ञानी राधा अनादर कोरो-इ अभिमानी
अर्थ

जो राधा के बिना केवल श्रीकृष्ण की पूजा करता है, वह मूर्ख है। जो राधा का अनादर करता है, वह अभिमानी है।

कबँहि नाहि कोरोबि ताङ्कोर सङ्ग चित्ते इच्छसि जदि ब्रज-रस-रङ्ग
अर्थ

यदि तुम्हारे हृदय में व्रज के प्रेम-रस का आस्वादन करने की इच्छा है, तो ऐसे लोगों की संगति कभी मत करो।

राधिका-दासी जदि होय अभिमान शीघ्र-इ मिल-इ तब गोकुल-कान
अर्थ

यदि तुम स्वयं को राधा की दासी मानोगे, तो गोकुल के श्रीकृष्ण तुमसे शीघ्र ही मिलेंगे।

ब्रह्मा शिब नारद श्रुति नारायणी राधिका-पद-रज पूजये मानि'
अर्थ

ब्रह्मा, शिव, नारद, वेद और नारायणी (लक्ष्मी), ये सभी श्री राधा के चरणों की रज को आदरपूर्वक पूजते हैं।

उमा रमा सत्या शची चन्द्रा रुक्मिणी राधा-अबतार सबे - आम्नाय-बाणी
अर्थ

पार्वती, लक्ष्मी, सत्यभामा, शची, चन्द्रावली और रुक्मिणी, ये सब श्री राधा के ही अवतार हैं। यह वेदों का वचन है।

हेनो राधा-परिचर्जा जाङ्कर धन भकतिबिनोद ताँ'र मागये चरण
अर्थ

श्री राधा की ऐसी सेवा जिनका एकमात्र धन है, भक्तिविनोद उन्हीं के चरणों की भिक्षा माँगते हैं।