शत कोटि गोपी माधब मन
सैकड़ों करोड़ों गोपियाँ यत्नपूर्वक प्रयास करके भी माधव के हृदय को शान्त नहीं रख पाईं।
अपनी बांसुरी के गीत में श्याम राधिका का नाम पुकारते हैं: 'आओ राधे, आओ राधे' कहकर श्याम बुलाते हैं।
तब श्री रास-मण्डल को तोड़कर श्रीकृष्ण राधा की खोज में चल पड़ते हैं।
'राधे! मुझे अपने दर्शन दो, मेरे प्राण बचा लो', यों कहते हुए श्रीकृष्ण वन में रोते हैं।
एकान्त वन में राधा को पाकर श्रीकृष्ण उनका आलिंगन करते हैं। उस मिलन से श्रीकृष्ण के व्याकुल प्राण शीतल हो जाते हैं।
श्रीकृष्ण कहते हैं: 'तुम्हारे बिना रास-नृत्य कैसे हो सकता है? मैं व्रज में केवल तुम्हारे लिए ही रहता हूँ।'
श्री राधा के चरणों में इस प्रकार खड़े होकर भक्तिविनोद रोते हुए कहते हैं:
'मुझे अपने परिकर में गिनकर, अपनी दासी बनाकर मुझे अपने पास रख लीजिए।'