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“गोविन्द” के परिणाम

219 भजन · 261 पद भजन के शब्दों में

28 पद भजन में 7

भगवान ब्रह्मा · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    ईश्वरः परमः कृष्णः
    सच्-चिद्-आनन्द-विग्रहः
    अनादिर् आदिर् गोविन्दः
    सर्व-कारण-कारणम्
  • पद 2भजन
    चिन्तामणि-प्रकर-सद्मसु कल्प-वृक्ष
    लक्षावृतेषु सुरभीर् अभिपालयन्तम्
    लक्ष्मी-सहस्र-शत-सम्भ्रम-सेव्यमानं
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
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  • पद 3भजन
    वेणुं क्वणन्तम् अरविन्द-दलायताक्षम्
    बर्हावतंसम् असिताम्बुद-सुन्दराङ्गम्
    कन्दर्प-कोटि-कमनीय-विशेष-शोभं
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 4भजन
    आलोल-चन्द्रक-लसद्-वनमाल्य-वंशी
    रत्नाङ्गदं प्रणय-केलि-कला-विलासम्
    श्यामं त्रि-भङ्ग-ललितं नियत-प्रकाशं
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 5भजन
    अङ्गानि यस्य सकलेन्द्रिय-वृत्ति-मन्ति
    पश्यन्ति पान्ति कलयन्ति चिरं जगन्ति
    आनन्द-चिन्मय-सद्-उज्ज्वल-विग्रहस्य
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 6भजन
    अद्वैतम् अच्युतम् अनादिम् अनन्त-रूपम्
    आद्यं पुराण-पुरुषं नव-यौवनं च
    वेदेषु दुर्लभम् अदुर्लभम् आत्म-भक्तौ
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 7भजन
    पन्थास् तु कोटि-शत-वत्सर-सम्प्रगम्यो
    वायोर् अथापि मनसो मुनि-पुङ्गवानाम्
    सो 'प्य् अस्ति यत्-प्रपद-सीम्न्य् अविचिन्त्य-तत्त्वे
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 8भजन
    एको 'प्य् असौ रचयितुं जगद्-अण्ड-कोटिं
    यच्-छक्तिर् अस्ति जगद्-अण्ड-चया यद्-अन्तः
    अण्डान्तर-स्थ-परमाणु-चयान्तर-स्थम्
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 9भजन
    यद्-भाव-भावित-धियो मनुजास् तथैव
    सम्प्राप्य रूप-महिमासन-यान-भूषाः
    सूक्तैर् यम् एव निगम-प्रथितैः स्तुवन्ति
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 10भजन
    आनन्द-चिन्मय-रस-प्रतिभाविताभिस्
    ताभिर् य एव निज-रूपतया कलाभिः
    गोलोक एव निवसत्य् अखिलात्म-भूतो
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 11भजन
    प्रेमाञ्जन-च्छुरित-भक्ति-विलोचनेन
    सन्तः सदैव हृदयेषु विलोकयन्ति
    यं श्यामसुन्दरम् अचिन्त्य-गुण-स्वरूपं
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
  • पद 12भजन
    रामादि-मूर्तिषु कला-नियमेन तिष्ठन्
    नानावतारम् अकरोद् भुवनेषु किन्तु
    कृष्णः स्वयं समभवत् परमः पुमान् यो
    गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम् अहं भजामि
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71 पद भजन में 2

बिल्वमंगल ठाकुर

  • पद 1भजन
    अग्रे कुरूणाम् अथ पाण्डवानां
    दुःशासनेनाहृत-वस्त्र-केशा
    कृष्णा तदाक्रोशद् अनन्य-नाथा
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 2भजन
    श्री कृष्ण विष्णो मधु-कैटभारे
    भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे
    त्रायस्व मां केशव लोकनाथ
    गोविन्द दामोदर माधवेति
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  • पद 3भजन
    विक्रेतुकामा किल गोप-कन्या
    मुरारि-पादार्पित-चित्त-वृत्तिः
    दध्यादिकं मोहवशाद् अवोचद्
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 4भजन
    उलूखले सम्भृत-तन्डुलांश् च
    सङ्घट्टयन्त्यो मुसलैः प्रमुग्धाः
    गायन्ति गोप्यो जनितानुरागा
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 5भजन
    काचित् कराम्भोज् अ-पुटे निषण्णं
    क्रीडा-शुकं किंशुक-रक्त-तुण्डम्
    अध्यापयाम् आस सरोरुहाक्षी
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 6भजन
    गृहे गृहे गोप-वधू-समूहः
    प्रति-क्षणं पिञ्जर-सारिकानाम्
    स्खलद्-गिरं वाचयितुं प्रवृत्तो
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 7भजन
    पर्य्यङ्किकाभाजम् अलम् कुमारं
    प्रस्वापयन्त्यो 'खिल-गोप-कन्याः
    जगुः प्रबन्धं स्वर-ताल-बन्धं
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 8भजन
    रामानुजं वीक्षण-केलि-लोलंगोपि
    ग्еहीत्वा नव-नीत-गोलम्
    आबालकं बालकम् आजुहाव
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 9भजन
    विचित्र-वर्णाभरणाभिरामे
    -भिधेहि वक्त्राम्बुज-राजःअंसे
    सदा मदीये रसने 'ग्र-रङ्गे
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 10भजन
    अङ्काधिरूढं शिशु-गोप-गूढं
    स्तनं धयन्तं कमलैक-कान्तम्
    सम्बोधयाम् आस मुदा यशोदा
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 11भजन
    क्रीडन्तम् अन्तर्-व्रजम् आत्मनं स्वं
    समं वयस्यैः पशु-पाल-बालैः
    प्रेम्णा यशोदा प्रजुहाव कृष्णं
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 12भजन
    यशोदया गाढम् उलूखलेन
    गो-कण्ठ-पाशेन निबध्यमनम्
    रुरोद मन्दं नवनीत-भोजी
    गोविन्द दामोदर माधवेति
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9 पद भजन में 2

आदि शंकराचार्य

  • पद 1भजन
    सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यमनाकाशं परमाकाशं
    गोष्ठप्राङ्गणरिङ्खणलोलमनायासं परमायासम्
    मायाकल्पितनानाकारमनाकारं भुवनाकारं
    क्ष्माया नाथमनाथं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 2भजन
    मृत्स्नामत्सीहेति यशोदाताडनशैशव सन्त्रासं
    व्यादितवक्त्रालोकितलोकालोकचतुर्दशलोकालिम्
    लोकत्रयपुरमूलस्तम्भं लोकालोकमनालोकं
    लोकेशं परमेशं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
इस भजन में 7 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    त्रैविष्टपरिपुवीरघ्नं क्षितिभारघ्नं भवरोगघ्नं
    कैवल्यं नवनीताहारमनाहारं भुवनाहारम्
    वैमल्यस्फुटचेतोवृत्तिविशेषाभासमनाभासं
    शैवं केवलशान्तं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 4भजन
    गोपालं प्रभुलीलाविग्रहगोपालं कुलगोपालं
    गोपीखेलनगोवर्धनधृतिलीलालालितगोपालम्
    गोभिर्निगदित गोविन्दस्फुटनामानं बहुनामानं
    गोपीगोचरपथिकं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 5भजन
    गोपीमण्डलगोष्ठिभेदं भेदावस्थमभेदाभं
    शश्वद्गोखुरनिर्घूतोद्धतधूलीधूसरसौभाग्यम्
    श्रद्धाभक्तिगृहीतानन्दमचिन्त्यं चिन्तितसद्भावं
    चिन्तामणिमहिमानं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 6भजन
    स्नानव्याकुलयोषिद्वस्त्रमुपादायागमुपारूढं
    व्यादित्सन्तिरथ दिग्वस्त्रा ह्युपदातुमुपाकर्षन्तम्
    निर्धूतद्वयशोकविमोहं बुद्धं बुद्धेरन्तस्थं
    सत्तामात्रशरीरं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 7भजन
    कान्तं कारणकारणमादिमनादिं कालमनाभासं
    कालिन्दीगतकालियशिरसि मुहुर्नृत्यन्तं नृत्यन्तम्
    कालं कालकलातीतं कलिताशेषं कलिदोषघ्नं
    कालत्रयगतिहेतुं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 8भजन
    वृन्दावनभुवि वृन्दारकगणवृन्दाराध्यं वन्दे’हं
    कुन्दाभामलमन्दस्मेरसुधानन्दं सुहृदानन्दम्
    वन्द्याशेषमहामुनिमानसवन्द्यानन्दपदद्वन्द्वं
    वन्द्याशेषगुणाब्धिं प्रणमत गोविन्दं परमानन्दम्
  • पद 9भजन
    गोविन्दाष्टकमेतदधीते गोविन्दार्पित चेता यो
    गोविन्दाच्युत माधव विष्णो गोकुलनायक कृष्णेति
    गोविन्दाङ्घ्रिसरोजध्यानसुधाजलधौतसमस्ताघो
    गोविन्दं परमानन्दामृतमन्तःस्थं स तमभ्येति
7 पद भजन में

  • पद 1भजन
    हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
    गोपाल गोविन्द राम श्री मधुसूदन
  • पद 3भजन
    गोविन्द जय जय गोपाल जय जय
    राधा रमण हरि गोविन्द जय जय
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  • पद 4भजन
    जय गोविन्द जय गोपाल
    केशव माधव दीन दोयाल
    श्यामसुन्दर कन्हैया लाल
    गिरिवर धारी नन्द दुलाल
  • पद 5भजन
    अच्युत केशव श्रीधर माधव गोपाल गोविन्द हरि
    यमुना पुलिन में, वंशी बजावे, नटवर वेश धारी
  • पद 8भजन
    कृष्णाय वासुदेवाय
    देवकी नन्दनाय च
    नन्द गोप कुमाराय
    गोविन्दाय नमो नमः
  • पद 9भजन
    हे कृष्ण गोविन्द हरे मुरारि
    हे नाथ नारायण वासुदेव
  • पद 11भजन
    हरि हरि हरिबोल, हरि हरि हरि बोल
    मुकुन्द माधव गोविन्द बोल
6 पद भजन में

रघुनाथ दास गोस्वामी

  • पद 8भजन
    स्नेहलाभीर-राजेन्द्र-वत्सलाच्युत-पूर्वजा
    गोविन्द-प्रणयाधार-सुरभि-सेवनोत्सुका
  • पद 37भजन
    गोविन्दाधर-पीयूष-वासिताधर-पल्लवा
    सुधा-सञ्चय-चारूक्ति-शीतली-कृत-माधवा
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
  • पद 38भजन
    गोविन्दोद्गीर्ण-ताम्बूल-राग-रज्यत्-कपोलिका
    कृष्ण-सम्भोग-सफली-कृत-मन्मथ-सम्भवा
  • पद 39भजन
    गोविन्द-मार्जितोद्दाम-रति-प्रस्विन्न-सन्-मुखा
    विशाखा-वीजित-क्रीडा-श्रान्ति-निद्रालु-विग्रहा
  • पद 40भजन
    गोविन्द-चरण-न्यस्त-काय-मानस-जीवना
    स्व-प्राणार्बुद-निर्मञ्छ्य-हरि-पाद-रजः-कणा
  • पद 41भजन
    अणु-मात्राच्युतादर्श-शप्यमानात्म-लोचना
    नित्य-नूतन-गोविन्द-वक्त्र-शुभ्रांशु-दर्शना
5 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 3भजन
    श्री-गोविन्द व्रजानन्द
    गोकुलानन्द-दायक
    मुकुन्द परमानन्द
    व्रजेन्द्र नन्द-नन्दन
  • पद 4भजन
    श्री-श्री-वृन्दावनानन्द
    यशोदानन्द-वर्धन
    राधा-गोविन्द राधेश
    राधिका-प्राण-वल्लभ
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
  • पद 12भजन
    गोविन्द बाल मुकुन्द
    नवनीतस्य-तस्कर
    ब्रह्मण्य-देव ब्रह्मात्मन्
    ब्रह्म-दर्प-विघातक
  • पद 13भजन
    देवेन्द्र परमानन्द
    गोविन्द नन्द-बालक
    राधा-विनोदिनी-स्वामिन्
    श्री-गोपी-जन-वल्लभ
  • पद 18भजन
    सर्वान्तर्-यामिन् गोविन्द
    विश्वाधार जगन्मय
    नारायण जगन्नाथ
    श्री-विष्णो श्री-जनार्दन
5 पद भजन में

गुणराज खान · श्री कृष्ण विजय

  • पद 2भजन
    सर्ब-क्षण सर्ब-जन गोविन्द पाइल
    जन्म-जन्म-कृत-पाप सब दूर हैल
  • पद 13भजन
    कोथा आछे गोविन्दाइ जाब ताँर ठाञि
    कोन् प्रकारे ताँर दरशन पाइ
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
  • पद 14भजन
    नेह मते गोविन्देर चिन्ते गोपी-गण्
    अन्तर्जामी गोसाञी जानिल तखन्
  • पद 15भजन
    जानिया त' गोविन्दाइ पाति जोगमाया
    करिब त' रास-क्रीडा बृन्दाबने गिया
  • पद 17भजन
    एक-चित्ते शुन नर संसार-तारण्
    गुणराज खान्न बोले गोविन्द-चरण्
3 पद भजन में 4

कुलशेखर आलवार · और भजन

  • पद 23भजन
    नाथे धातरि भोगि-भोग-शयने नारायणे माधवे
    देवे देवकि-नन्दने सुर-वरे चक्रायुधे शार्ङ्गिणि
    लीलाशेष-जगत्-प्रपञ्च-जठरे विश्वेश्वरे श्रीधरे
    गोविन्दे कुरु चित्त-वृत्तिम् अचलाम् अन्यैस् तु किं वर्तनैः
  • पद 29भजन
    अनन्त वैकुण्ठ मुकुन्द कृष्ण
    गोविन्द दामोदर माधवेति
    वक्तुं समर्थो 'पि न वक्ति कश्चिद्
    अहो जनानां व्यसनाभिमुख्यम्
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  • पद 39भजन
    त्यजन्तु बान्धवाः सर्वे
    निन्दन्तु गुरवो जनाः
    तथापि परमानन्दो
    गोविन्दो मम जीवनम्
3 पद भजन में 3

वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    गोविन्द हरि गोपाल हरि
    गोविन्द हरि गोपाल हरि
    जय जय देव हरि
    जय जय देव हरि
  • पद 4भजन
    गोविन्द हरि गोपाल हरि
    गोविन्द हरि गोपाल हरि
    जय जय देव हरि
    जय जय देव हरि
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 6भजन
    गोविन्द हरि गोपाल हरि
    गोविन्द हरि गोपाल हरि
    जय जय देव हरि
    जय जय देव हरि
4 पद भजन में

रूप गोस्वामी

  • पद 5भजन
    राधा कृष्ण-वनाधीशा मुकुन्द-मधु-माधवी
    गोविन्द-प्रेयसी-वृन्द-मुख्या वृन्दावनेश्वरी
  • पद 11भजन
    सदा किशोरिका गोष्ठ-युवराज-विलासिनी
    गोविन्द-प्रेम-शिक्षार्थ-नटी-कृत-निजांशका
इस भजन में 2 और मिलान दिखाएँ
  • पद 14भजन
    रासोत्सव-पुरो-गण्या कृष्ण-नीत-रहः-स्थला
    गोविन्द-बन्ध-कवरी कृष्णोत्तंसित-कुन्तला
  • पद 23भजन
    अरिष्ट-वध-नर्मार्थ-निर्मापित-सरोवरा
    गन्धोन्मादित-गोविन्दो माधव-द्वन्द्वताङ्किता
2 पद भजन में 8

कृष्ण दास · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन्
    श्री गोविन्द, गोपीनाथ, मदन-मोहन्
  • पद 8भजन
    जय द्विज-पत्नी, जय नाग-कन्या-गण्
    भक्तिते जाहारा पाइलो गोविन्द-चरण्
3 पद भजन में

नरोत्तम दास ठाकुर · प्रेम-भक्ति-चन्द्रिका

  • पद 4भजन
    विषय गरल-मय, ता'ते मानो सुख-चय,
    सेइ सुख दुःख कोरि मानो
    गोविन्द विषय रस, सङ्ग कोरो तार दास,
    प्रेम भक्ति सत्य कोरि जानो
  • पद 5भजन
    मध्ये मध्ये आछे दुष्ट, दृष्टि कोरि होय रुष्ट
    गुण विगुण कोरि माने
    गोविन्द विमुख जन, स्फूर्ति नहे हेनो धन
    लौकिक कोरिया सब जाने
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 7भजन
    आर सब परिहरि, परम ईश्वर हरि,
    सेवो मन! प्रेम कोरि आश
    एक व्रज राज पुरे, गोविन्द रसिक वरे
    कोरोह सदाइ अभिलाष
1 पद भजन में 13

वासुदेव घोष · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 5भजन
    …राधा-भाव-कान्ति लोये ब्रज हो'ते नदीयारे
    सेइ तो' एसेछे
    ए-बार् गोविन्द गौराङ्ग हो'ये सेइ तो' एसेछे
    गोविन्द गौराङ्ग हो'ये सेइ तो' एसेछे
1 पद भजन में 13

श्रीनिवास आचार्य · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 3भजन
    श्री-गौराङ्ग-गुणानुवर्णन-विधौ श्रद्धा-समृद्ध्य्-अन्वितौ
    पापोत्ताप-निकृन्तनौ तनु-भृतां गोविन्द-गानामृतैः
    आनन्दाम्बुधि-वर्धनैक-निपुणौ कैवल्य-निस्तारकौ
    वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ