नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
श्री नवद्वीप धाम प्रणाम
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अक्षर
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गाते समय
श्रुतिच्-छान्दोग्याख्या वदति परमं ब्रह्म-पुरकं
स्मृतिर् वैकुण्ठाख्यां वदति किल यं विष्णु-सदनम्
सितद्वीपं चान्ये विरल-रसिको यं व्रज-वनं
नवद्वीपं वन्दे तम् इह परमानन्द-निलयम्
अर्थ
छान्दोग्य नाम की श्रुति इसे परब्रह्म का नगर कहती है। स्मृति इसे वैकुण्ठ, अर्थात् विष्णु का धाम बताती है। कुछ लोग इसे श्वेतद्वीप कहते हैं और रस का स्वाद लेने वाले विरले भक्त इसे व्रज का वन जानते हैं। परम आनन्द के उस धाम नवद्वीप की मैं यहाँ वन्दना करता हूँ।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- प्रणाम मन्त्र
- भाव
- पद
- 1