नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
श्रील माधवेन्द्र पुरी प्रणाम
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अक्षर
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गाते समय
यस्मै दातुं चोरयन् क्षीर-भाण्डं
गोपीनाथः क्षीर-चोराभिधो 'भूत्
श्री-गोपालः प्रादुरासीद् वशः सन्
यत्-प्रेम्णा तं माधवेन्द्रं नतो 'स्मि
अर्थ
मैं श्री माधवेन्द्र पुरी को प्रणाम करता हूँ। उन्हें देने के लिए गोपीनाथ ने खीर का पात्र चुराया और तभी से वे क्षीर-चोरा, यानी खीर-चोर, कहलाए। उन्हीं के प्रेम के वश होकर श्री गोपाल प्रकट हुए।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- कृष्णदास कविराज गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- प्रणाम मन्त्र
- भाव
- पद
- 1