Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

स्वप्ने सखि पुनर् अद्य मुकुन्दम्

स्वप्ने सखि पुनर् अद्य मुकुन्दम् आलोकयम् अवतंसित-कुन्दम्
अर्थ

स्वप्न में, हे सखी, आज फिर मैंने मुकुन्द को देखा, कुन्द पुष्पों के कर्णफूल से सुसज्जित।

राज-पुराद् गोकुलम् उपयातम् प्रमदोन्मदित-जननी-ततम्
अर्थ

मैंने उन्हें राजधानी से गोकुल की ओर आते देखा, जहाँ माताओं की पंक्ति आनंद से अभिभूत थी।

परम-महोत्सव-घूर्णित-घोषम् नयनेङ्गित-कृत-मत्-परितोषम्
अर्थ

मैंने देखा कि गोकुल परम उत्सव के आनंद में झूम रहा है, और वे अपनी आँखों के एक इशारे से मुझे संतोष दे रहे हैं।

नव-गुञ्जावलि-कृत-पर-भागम् प्रबल-सनातन-सुहृद्-अनुरागम्
अर्थ

ताज़ी गुंजा-माला से उनकी शोभा और बढ़ गई थी, उनका गहरा और अटूट प्रेम उनके प्रिय मित्र सनातन के प्रति समर्पित था।

इस भजन के बारे में

पद
4