Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तब पद पङ्कजिनी जीबामृत सञ्चारिणी

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हरि हे तब पद-पङ्कजिनी जीबामृत-सञ्चारिणी अति-भाग्ये जीब ताहा पाय से अमृत पान कोरि' मुग्ध होय ताहा होरि आर ताहा छाडिते ना चाय
अर्थ

हे कृष्ण! जो जीव बहुत भाग्यशाली होता है, उसे आपके चरण-कमलों का वह सरोवर मिल जाता है, जो जीवन देने वाले अमृत से भरा है। हे हरि, उस अमृत को पीकर वह आनन्द में मग्न हो जाता है, और फिर उसे कभी छोड़ना नहीं चाहता।

निबिष्ट होइया ताय अन्य स्थाने नाहि जाय अन्य रस तुच्छ कोरि' मने मधु-पूर्ण-पद्म-स्थित मधुब्रत कदाचित नाहि चाय इखु-दण्ड-पाने
अर्थ

उस सरोवर में प्रवेश करके वह फिर किसी और स्थान पर जाना नहीं चाहता। अपने हृदय में वह बाकी सभी रसों को तुच्छ मानता है। जैसे मधु से भरे कमल में बैठा भ्रमर कभी गन्ने का रस पीने नहीं जाना चाहता।

ए भक्तिबिनोद कबे से पङ्कज-स्थित ह'बे नाहि ज'बे सोंसाराभिमुखे भक्त-कृपा भक्ति-बल एइ दुइटी सु-सम्बल पाइले से स्थिति घटे सुखे
अर्थ

भक्तिविनोद कहते हैं, उस कमल-सरोवर में बसकर मैं फिर कभी संसार की ओर नहीं लौटूँगा। भक्तों की कृपा और भक्ति का बल, ये ही मेरी दो अनमोल सम्पत्तियाँ हैं। इन्हें पाकर अब मैं सुखी हूँ।