श्री वृन्दावन की शोभा
वृन्दावन तुलसी, मालती, यूथी, आमलक, कुन्द, तथी, मरुबक, चम्पा, नागेश्वर, अडिला, बकुल-माली, झिण्टी, केतकी और केशर के बहुत से फूलों से सुगन्धित है, जहाँ बहुत से भौंरे खेलते हैं।
वृन्दावन अशोक, बासक, केया, किंशुक, रंगिला, चूया, शेफालिका, पाकाड़ी, ताल, नारिकेल, तमाल और रामगुया के बहुत से वृक्षों से अत्यन्त सुन्दर है।
वृन्दावन खिले हुए सैकड़ों शिमली, पनस, गुया, जलपाई, कामरांगा, रक्त-चन्दन, अर्जुन, खेजुर, क्षीरी, नबाड़ी और हेताल के वृक्षों के अनेक कुंजों से सुन्दर है।
वृन्दावन अनेक रंगों और प्रकारों के वृक्षों, खिली हुई माधवी लताओं, बहुत से सुन्दर फूलों, तोतों के गान और बड़ी पूँछ वाले मोरों से सुन्दर है।
वृन्दावन सोने के रंग के खिले हुए बहुत से फूलों, गुंजा की झाड़ियों, सुनहरे चम्पा के फूलों, कमल के फूलों, कुमुदिनियों, शियालित फूलों और सुन्दर सरोवरों से शोभायमान है।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- गुणराज खान
- ग्रन्थ
- श्री कृष्ण विजय
- पद
- 5