वैकुन्थ होइते स्रेस्थ
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
वैकुण्ठ से भी श्रेष्ठ है मथुरा नगरी, क्योंकि वहीं भगवान् कृष्णचन्द्र हरि ने जन्म लिया।
मथुरा से भी श्रेष्ठ है वृन्दावन-धाम, क्योंकि वहीं हरि ने रास-महोत्सव की अपनी अभिलाषा पूर्ण की।
वृन्दावन से भी श्रेष्ठ है गोवर्धन पर्वत, क्योंकि वहीं गिरिधारी ने गान्धर्विका के साथ लीला की।
गोवर्धन से भी श्रेष्ठ है राधा-कुण्ड का तट, क्योंकि वहीं गोकुल के उस मनमोहक चितचोर ने सारे संसार को प्रेम के अमृत में डुबो दिया।
जो गोवर्धन पर्वत की तलहटी में स्थित राधा-कुण्ड को छोड़कर कहीं और अपना कुंज और पुष्प-वाटिका बनाता है,
उससे बढ़कर मूर्ख कोई नहीं है। राधा-कुण्ड का तट समस्त स्थानों में सर्वोत्तम है, वह दिव्य प्रेम का साक्षात् आगार है।