विलसति दोलोपरि वन मलि
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
वन-माला धारण किए भगवान् झूले पर विहार कर रहे हैं, मानो काँपते, झूलते कमल के ऊपर कोई भ्रमर मँडरा रहा हो।
उनके चारों ओर शुभचिन्तकों की पंक्तियाँ झुककर प्रणाम कर रही हैं, जबकि उनके आनन्दित मित्र उन्हें धीरे-धीरे आगे-पीछे झुला रहे हैं।
वे गोपियों के हाथों को तालियाँ बजाने पर विवश कर देते हैं, जबकि एक ग्वालिन उनके सामने नृत्य कर रही है।
उनकी जय हो, जो साक्षात् वन के आभूषण हैं, दिव्य रस के सनातन पालक हैं!