आमि तो दुर्जन अति सदा दुराचार
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2 रिकॉर्डिंगमैं तो अत्यन्त दुर्जन और सदा दुराचारी हूँ। करोड़ों-करोड़ों जन्मों तक भी मेरा उद्धार नहीं होगा।
इस संसार में ऐसा दयालु कौन है, जो इस पापी का उद्धार करके उसे अपने पास शरण देगा?
मैंने सुना है कि श्रीचैतन्य, जो पतित-पावन हैं, उन्होंने असंख्य पापियों का उद्धार किया है।
वे दया के सागर के समान हैं। कब वे कृपा करके मुझे अपने श्रीचरणों में शरण देंगे और मेरा उद्धार करेंगे?
यदि तुम इस पापी का उद्धार करोगे, तब मैं जानूँगा कि तुम सचमुच करुणामय हो।
मुझमें न कर्म है, न ज्ञान है, न कृष्ण-भक्ति है। तो फिर मैं तुम्हारे श्रीचरणों को कैसे प्राप्त करूँ? कृपया मुझे बताओ।
मेरा एकमात्र आधार तुम्हारी कृपा ही है। वेद कहते हैं कि तुम्हारी वह कृपा निष्कारण है।
तुम पवित्रता के धाम हो, और मैं पापी हूँ। तुम्हारे चरणों में मुझे शरण कैसे मिलेगी?
रोते-रोते यह पतित पापी, जो राख के ढेर के समान तुच्छ है, कहता है: हे प्रभु! तुम्हारा नाम 'पतित-पावन' के रूप में विख्यात है!
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर। सभी भक्त गायकों की जय।