आर कि एमन दशा हब
क्या मुझे कभी ऐसी दशा प्राप्त होगी, जब मैं सब कुछ त्यागकर वृन्दावन चला जाऊँगा?
और कब मैं रास-मंडल में आनंदपूर्वक धरती पर लोटूँगा?
और कब मैं आँसुओं से भरी आँखों से गोवर्धन पर्वत का दर्शन करूँगा?
श्याम-कुंड और राधा-कुंड में स्नान करके, कब मेरा प्राण शांत और शीतल होगा?
और कब यमुना के जल में डुबकी लगाकर मैं पवित्र हो जाऊँगा?
साधुओं के संग वृन्दावन में निवास करने की आशा नरोत्तम दास मन में रखते हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- प्रार्थना
- भाव
- पद
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