हा हा प्रभु ! कर दया करुणा तोमार
हा हा प्रभु! मुझ पर अपनी दया और करुणा करो। इस मिथ्या माया-जाल में मेरा शरीर जल रहा है।
कब मुझे ऐसी दशा प्राप्त होगी कि गोपियों का संग मिलेगा? वृन्दावन के फूलों की माला गूँथकर, कब मैं दिव्य युगल को पहनाऊँगा?
कब मैं उनके सामने बैठकर चामर डुलाऊँगा? कब मैं दोनों के अंगों पर अगुरु और चंदन का सुगंधित लेप लगाऊँगा?
सखियों की आज्ञा से कब मैं दिव्य युगल को तांबूल भेंट करूँगा? कब मैं उनके ललाट पर सिंदूर से तिलक सजाऊँगा?
अपनी आँखों से कब मैं उनकी आनंदमय क्रीड़ा देखूँगा? कब मैं सिंहासन पर बैठे उनके चंद्रमुखों का दर्शन करूँगा?
मन की उत्कंठा से उस माधुर्य को निरंतर देखते रहने के लिए, नरोत्तम दास पर कब दया होगी?
इस भजन के बारे में
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- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।