वृन्दावन रम्य स्थान
वृन्दावन रम्य-स्थान दिव्य-चिँतामणि-धाम
गहरी आध्यात्मिक उत्कण्ठा के भजन, जो बार-बार पूछते हैं: वह दिन कब आएगा?
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वृन्दावन रम्य-स्थान दिव्य-चिँतामणि-धाम
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिने
गुरुदेव्!
कबे कृष्ण-धन पाब हियार माझारे थोब
गुरुदेव्!
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिन
हरि हरि कबे मोर हो'बे हेनो दिन
हा हा प्रभु ! कर दया करुणा तोमार
एइ नव-दासी बलि श्री-रूप चाहिबे
कबे मुइ बैष्णबे चिनिबो हरि हरि
कबे ह'बे हेनो दशा मोर
कृपा कोरो' बैष्णब ठाकुर
जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द
हरि हे!
लोकनाथ प्रभु ! तुमि दया कर मोरे
शुनियाछि साधु-मुखे बले सर्व-जन
श्री-रूप पश्चाते आमि रहिब भीत हञा
हा हा ! प्रभु लोकनाथ राख पाद-द्वन्द्वे
हरि हे!
आमार एमोन भाग्य कोत दिने ह'बे
आर कि एमन दशा हब
एइ-बार पाइले देखा चरण दु’ खानि
कदम्ब तरुर डाल नामियाछे भूमे भाल
कबे आहा गौराङ्ग बोलिया
कबे मोर मूढ मन छारि' अन्य ध्यान
कबे मोर शुभ-दिन होइबे उदोय
गुरुदेव्!
करङ्ग कौपीन लञा छेँड काँथा गाय दिया
गोवर्धन गिरिवर केवल निर्जन स्थल
चिन्तामणि-मोय राधा-कुण्ड-तट
चैतन्य-चन्द्रेर लीला समुद्र अपार
हरि हे!
हरि हे!
देखिते देखिते भुलिबो बा कबे
निर्जन कुटीरे श्री राधा चरण
हरि हे!
पाल्य-दासी करि' ललिता सुन्दरी
बरणे तडित् बास ताराबली
बृषभानु-सुता- चरण-सेबने
बृषभानु-सुता- चरण-सेवने,
हरि हे!
श्री-कृष्ण-बिरहे राधिकार दास
श्री-गुरु-बैष्णब-कृपा कोत दिने हबे
हरि हे!
श्री रूप मञ्जरी कबे मधुर बचने
हरि हे!
हरि हरि ! आर कबे पालटिबे दशा
हरि हरि ! कबे हब वृन्दावन-वासी