Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अरे भाइ! भज मोर

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अरे भाइ! भज मोर गौराङ्ग-चरण ना भजिया मैनु दुःखे डुबि गृह-बिष-कूपे दग्ध कैल ए पाञ्च पराण
अर्थ

हे भाई! तू गौरांग के चरणों की भक्ति कर। मैंने उनकी भक्ति नहीं की, इसके बदले गृहस्थ जीवन के विषभरे कुएँ में डूब गया, और इसी कारण मेरे ये पाँचों प्राण विष की आग में जल रहे हैं।

ताप-त्रय-बिषानले अहर्-निशि हिया ज्वले देह सदा हय अचेतन रिपु-बश इन्द्रिय हैल गौर-पद पाशरिल बिमुख हैल हेन धन
अर्थ

दिन-रात मैं त्रिविध दुःखों की विषाग्नि में जलता रहता हूँ, और इसी कारण बार-बार मूर्छित हो जाता हूँ। काम, लोभ और अनगिनत शत्रुओं ने मेरी इन्द्रियों को अपने वश में कर लिया है, और मैं गौरांग के चरणों रूपी महाधन से विमुख हो गया हूँ।

हेन गौर दयामय छाडि सब लाज-भय काय मने लह रे शरण परम दुर्मति छिल तारे गौरा उद्धारिल ता’रा हैल पतित-पावन
अर्थ

हे भाई! सारा भय और संकोच छोड़कर तन-मन से ऐसे दयामय गौरांग की शरण ले। जो हृदय से बहुत दुष्ट था, उसका भी गौरांग ने उद्धार किया, इसीलिए वे पतित-पावन, अर्थात् पतितों के उद्धारक, कहलाते हैं।

गौरा द्विज-नट-राजे बान्धह हृदय-माझे कि करिबे संसार-शमन नरोत्तम दास कहे गौरा-सम केह नहे ना भजिते देय प्रेम-धन
अर्थ

यदि तू नर्तकों के राजा, ब्राह्मण गौरांग को अपने हृदय में बसा ले, तो मृत्यु तेरा क्या बिगाड़ सकेगी? नरोत्तम दास कहते हैं, गौरांग के समान कोई नहीं है। जो उनकी भक्ति नहीं करता, उसे भी वे प्रेम का धन दे देते हैं।

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।