अरे भाइ! भज मोर
अरे भाइ! भज मोर गौराङ्ग-चरण
भक्ति-जीवन पर सीख देने वाले भजन, जो अक्सर अपने ही मन को सम्बोधित होते हैं।
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अरे भाइ! भज मोर गौराङ्ग-चरण
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
प्रभु तब पद-जुगे मोर निबेदन
आर केनो माया-जाले पर्डितेछो जीब-मीन
रूपेर गौरब केनो भाइ
भज रे भज रे आमार मन अति मन्द
यदि ते हरि-पाद-सरोज-सुधा
श्री-कृष्ण-कीर्तने जदि मानस तोहार
अपराध-फले मम चित्त भेलो बज्र-सम
अपूर्ब बैष्णब-तत्त्व आत्मार आनन्द
ओरे मन बोलि शुनो तत्त्व-बिबरण
ओहे भाइ, मन केनो ब्रह्म हो'ते चाय
कि आर बोलिबो तोरे मन
कृष्ण कृष्ण-भक्त-गण गुण नाम सु-चरित
कृष्ण-भक्ति बिना कभु नाहि फलोदोय
कृष्णेर जतेक खेला तार मध्ये नर-लीला
केनो आर कोरो द्वेष बिदेषि-जन-भजने
केनो मन कामेरे नचाओ प्रेम-प्राय
गाइते गाइते नाम कि दशा होइलो
चिज्-जोडेर द्वैत जिनि कोरेन स्थापन
छाडि' अन्य अभिलाष ज्ञान-कर्म-सहाबास
जीबन-समाप्त-काले कोरिबो भजन
जेइ रति जन्मे जार सेइ मत रस तार
जोग जाग सब छार श्रद्धा सकलेर सार
जोग-पीठोपरि-स्थित अष्ट-सखी-सुबेष्टित
तुँहु दोया-सागोर तारयिते प्राणी
दर्शन आश्लेषन्वित आनुकूल्य सेबाश्रीत
दीक्षा-गुरु कृपा कोरि' मन्त्र-उपदेश
देखो मन ब्रते जेन ना हओ आच्छन्न
नायिकार शिरोमणि ब्रजे राधा ठाकुराणी
निराकार निराकार कोरिया चित्कार
निर्बेद बिषाद मद दैन्य ग्लानि श्रमोन्माद
पञ्च-सखी मध्ये चार नित्य-सिद्ध राधिकार
परम चैतन्य हरि ताँर शक्ति बनेश्वरी
पित-बरण कलि-पाबन गोरा
पीरिति सच्-चिद्-आनन्दे रूपबती नारी
बन्धु-गण शुनोह बचन मोर
बहु-जन्म-भाग्य-बशे चिन्मोय मधुर रसे
बिभाबित रति जबे क्रियापर हो'ये तबे
भाबना भाबना मन तुमि अति दुष्ट
मधुरेर स्थायी भाब लभे जते अबिर्भाब
मन तुमि तीर्थे सदा रत
मन तुमि बोरोइ चञ्चल
मन तुमि भालबास कामेर तरङ्ग
मन तुमि सन्न्यासी साजिते केनो चाओ
मन तोरे बोलि ए बारता
मन रे धन-मद नितान्त असार
मन रे, केनो आर बर्ण अभिमान