Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

भज भज हरि

भज भज हरि, मन दृढ करि', मुखे बोलो ता’र नाम व्रजेन्द्र-नन्दन गोपी-प्राण-धन, भुवन मोहन श्याम
अर्थ

हे मेरे प्रिय मन, दृढ़ विश्वास के साथ हरि-भजन करो, जिसके बिना तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता। और मुख से व्रजेन्द्रनन्दन, गोपी-प्राणधन (गोपियों के प्राण और धन) तथा श्यामसुन्दर के नाम बोलो, जिनका सौन्दर्य सारे भौतिक जगत को मोहित कर देता है।

कखन मरिबे, केमने तरिबे, विषम शमन डाके जाहार प्रतापे, भुवन कापये, ना जानि मर विपाके
अर्थ

तुम्हारा जीवन कब समाप्त होगा, इसका कोई निश्चय नहीं है, और तुम इस भौतिक संसार से अपने उद्धार के बारे में कभी सोचते भी नहीं। किन्तु अत्यन्त भयंकर यमदूत तुम्हारे पास ही खड़े हैं। जिन भगवान् के प्रताप से तीनों लोक भय से काँपते हैं, उन भगवान् को तुमने भुला दिया है। यह तुम्हारा दुर्भाग्य है। इसी कारण तुम इस भौतिक संसार में तरह-तरह के कष्ट भोग रहे हो और अब मरने ही वाले हो।

कुल-धन पाइया, उन्मत्त हैया, आपनाके जान बड शमनेर दूते, धरि’, पाये हाते, बाधिया करिबे जड
अर्थ

तुम ऊँचे कुल और धन को पाकर मतवाले हो गए हो और अपने को बहुत ऊँचे वर्ग का समझते हो। किन्तु तुम भूल गए हो कि एक दिन यमदूत तुम्हें पकड़ लेंगे और तुम्हारे हाथ-पैर बाँधकर तुम्हें निश्चल कर देंगे।

किवा यति सती, किवा नीच जाति, जेइ हरि नाहि भजे तबे जनमिया, भ्रमिया भ्रमिया, रौरव-नरके मजे
अर्थ

इसलिए चाहे कोई संन्यासी हो या बहुत निम्न जाति का व्यक्ति, जो हरि-भजन नहीं करता, वह संसार में घूमता रहता है और रौरव नामक नरक में जाता है।

ए दास लोचन, भावे अनुक्षण, मिछाइ जनम गेल हरि ना भजिनु, विषये मजिनु, हृदये रहल शेल
अर्थ

लोचन दास कहता है, “मैंने कभी हरि-भजन नहीं किया, मैं इन्द्रिय-भोग में मग्न रहा। इस तरह मेरा यह मनुष्य जीवन व्यर्थ चला गया। और यह बात मेरे हृदय में काँटे की तरह चुभकर असह्य पीड़ा देती है।”

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
और भजन
पद
5

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।