भज भज हरि
हे मेरे प्रिय मन, दृढ़ विश्वास के साथ हरि-भजन करो, जिसके बिना तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता। और मुख से व्रजेन्द्रनन्दन, गोपी-प्राणधन (गोपियों के प्राण और धन) तथा श्यामसुन्दर के नाम बोलो, जिनका सौन्दर्य सारे भौतिक जगत को मोहित कर देता है।
तुम्हारा जीवन कब समाप्त होगा, इसका कोई निश्चय नहीं है, और तुम इस भौतिक संसार से अपने उद्धार के बारे में कभी सोचते भी नहीं। किन्तु अत्यन्त भयंकर यमदूत तुम्हारे पास ही खड़े हैं। जिन भगवान् के प्रताप से तीनों लोक भय से काँपते हैं, उन भगवान् को तुमने भुला दिया है। यह तुम्हारा दुर्भाग्य है। इसी कारण तुम इस भौतिक संसार में तरह-तरह के कष्ट भोग रहे हो और अब मरने ही वाले हो।
तुम ऊँचे कुल और धन को पाकर मतवाले हो गए हो और अपने को बहुत ऊँचे वर्ग का समझते हो। किन्तु तुम भूल गए हो कि एक दिन यमदूत तुम्हें पकड़ लेंगे और तुम्हारे हाथ-पैर बाँधकर तुम्हें निश्चल कर देंगे।
इसलिए चाहे कोई संन्यासी हो या बहुत निम्न जाति का व्यक्ति, जो हरि-भजन नहीं करता, वह संसार में घूमता रहता है और रौरव नामक नरक में जाता है।
लोचन दास कहता है, “मैंने कभी हरि-भजन नहीं किया, मैं इन्द्रिय-भोग में मग्न रहा। इस तरह मेरा यह मनुष्य जीवन व्यर्थ चला गया। और यह बात मेरे हृदय में काँटे की तरह चुभकर असह्य पीड़ा देती है।”
इस भजन के बारे में
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- लोचन दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।