Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

एक दिन मने पहुं कैल आचम्बित

एक-दिन मने पहुं कैल आचम्बित पूर्ब देश याब आमि सब जन हित
अर्थ

एक दिन भगवान् गौर के मन में अचानक विचार आया, “वहाँ के लोगों के हित के लिए मैं पूर्व की ओर जाऊँगा।”

यात्रा करि यार पहुं सङ्गे निज जन छटफट करे शची मायेर जीबन
अर्थ

अपने निकटतम साथियों को साथ लेकर भगवान् गौर पूर्व की ओर यात्रा पर निकलने वाले थे। माता शची के जीवन-स्वरूप वे यात्रा के लिए बेचैन थे।

मायेरे कहेन प्रभु ना भाबिह तुमि तोमार निकटे सदा रहिब ये आमि
अर्थ

भगवान् गौर ने अपनी माता से कहा, “आप चिन्ता न कीजिए। मैं सदा आपके पास ही रहूँगा।”

लक्ष्मीरे करिल प्रभु हासिय उत्तर मातार सेबाय तुमि ह-इबा तत्-पर
अर्थ

लक्ष्मीप्रिया से भगवान् गौर ने मुस्कराकर कहा, “मेरी माता की सेवा करो। उनकी सेवा में तत्पर रहो।”

शुभ-यात्रा करे पहुं सङ्गे निज जन कौतुके भ्रमण करे आनन्दित मन
अर्थ

अपने निकटतम साथियों के साथ भगवान् गौर ने शुभ यात्रा आरम्भ की। वे प्रसन्न हृदय से भ्रमण करते रहे।

ब्राह्मण सज्-जन बैसे पद्माबती तटे दिब्य पुरुष नारी स्नान करे घाटे
अर्थ

ब्राह्मण और सज्जन पद्मावती के तट पर रहते थे। वहाँ के घाटों पर तेजस्वी दिव्य पुरुष और स्त्रियाँ स्नान करते थे।

बिश्वम्भर स्नान कैल से-पद्माबती सब-जन पाप-हरे स्नान कैले तथि
अर्थ

जब भगवान् विश्वम्भर ने उस पद्मावती में स्नान किया, तब वहाँ स्नान करने वाले सब लोग पापों से मुक्त हो गए।

पूर्ब-देशे बसति करय यत-जन सभारे याचिया पहुं दिले हरि-नाम
अर्थ

पूर्व के देश में जो लोग रहते थे, भगवान् गौर ने उन सबसे विनती की कि वे पवित्र नाम को स्वीकार करें। उन्होंने उन्हें भगवान् कृष्ण के पवित्र नाम का कीर्तन दिया।

शुचि बा अशुचि किबा आचार बिचार ना मानिल सबारे करिल भब पार
अर्थ

उन्होंने इस पर विचार नहीं किया कि कौन शुद्ध है और कौन अशुद्ध, या किसने अच्छा आचरण किया और किसने बुरा। उन्होंने सबको जन्म और मृत्यु की नदी के उस पार पहुँचा दिया।

नाम-सङ्कीर्तन प्रभु नौक साजा-इया पार कैल सर्ब-लोके आपनि याचिया
अर्थ

भगवान् गौर ने नाम-संकीर्तन (पवित्र नामों के कीर्तन) की नाव सजाई। उन्होंने स्वयं सबसे विनती की कि वे उस नाव में बैठें। उसी नाव से उन्होंने सबको जन्म और मृत्यु की नदी के उस पार पहुँचा दिया।

ये-जन पलाय तारे धरे कोले करि भब-नदी करे पार गौराङ्ग श्री-हरि
अर्थ

जो कोई उनसे भागा, उसे उन्होंने बाँहों में भर लिया। स्वयं भगवान् कृष्ण ही जो भगवान् गौरांग हैं, उन्होंने ऐसे लोगों को भी जन्म और मृत्यु की नदी के उस पार पहुँचा दिया।

लोचन कहिछे पहुं सर्ब-लोक-पति करुणा प्रकाशि लोकेर कैल शुद्ध-मति
अर्थ

लोचन दास कहता है: भगवान् गौर सब लोकों के स्वामी हैं। लोगों पर कृपा करके उन्होंने सबके हृदय को शुद्ध कर दिया।

इस भजन के बारे में

पद
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