Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

घरेरे आ इल प्रभु रत्न लैञा

घरेरे आ-इल प्रभु रत्न लैञा मातृ स्थाने दिल धन हरषित हैञा
अर्थ

भगवान् गौर बहुत-से रत्न लेकर घर लौट आते हैं। जो धन वे लाए थे, वह माता शची को प्रसन्नता से दे देते हैं।

नमस्कार करि प्रभु नेहारे बदन बिरस बदन शची ना कहे बचन
अर्थ

भगवान् गौर प्रणाम करते हैं और माता के मुख की ओर देखते हैं। शची का मुख उतरा और मुरझाया हुआ है, वे एक शब्द भी नहीं बोलतीं।

प्रभु कहे केन माता बिरस बदन तोमारे मैल्न देखि पोडे मोर मन
अर्थ

भगवान् गौर कहते हैं, “माँ, आपका मुख इतना उतरा और मुरझाया हुआ क्यों है? आपको इतना उदास देखकर मेरा हृदय जल उठता है।”

ए बोल शुनिया शची गदगद भाष झरये आङ्खिर नीर भिज होय बास
अर्थ

ये शब्द सुनकर शची गद्गद् स्वर में टूटे-टूटे शब्द बोलती हैं। उनकी आँखों से आँसू धारा बनकर बहते हैं और छाती पर का वस्त्र भिगो देते हैं।

कहिते ना पारे किछु स-करुण कण्ठ कहिल आमार बधू चलिल बैकुण्ठ
अर्थ

उनमें कुछ बोलने की शक्ति नहीं है। शोक से उनका कण्ठ भर आया है। अन्त में वे कहती हैं, “मेरी बहू वैकुण्ठ चली गई।”

प्रभु कहे शोक तेजि शुन मोर माता निर्बन्ध ना घुचे से-इ लिखन बिधाता
अर्थ

भगवान् गौर कहते हैं, “शोक छोड़ दीजिए। हे माँ, मेरी बात सुनिए। कोई भी अपने भाग्य को मिटा नहीं सकता, वह भाग्य जिसे ब्रह्मा उसके मस्तक पर लिखते हैं।”

पुत्रेर बचन शची शुनि साबधाने शोक ना करिल किछु न करिल मने
अर्थ

अपने पुत्र के वचन ध्यान से सुनकर शची ने शोक नहीं किया। उन्होंने अपने हृदय में भी शोक नहीं किया।

कहये लोचन दास शुनह चरित्र लक्श्मी स्वर्गे आरोहन बिश्वम्भर सङ्गीत
अर्थ

लोचन दास कहता है: कृपया यह लीला सुनिए, लक्ष्मीप्रिया के वैकुण्ठ जाने की लीला। इसी तरह मैंने भगवान् विश्वम्भर की लीलाओं का गान किया है।

इस भजन के बारे में

पद
8