एइ नव दासी बलि श्री रूप चाहिबे
कब श्री रूप-मंजरी मुझे 'यह नई दासी है' कहकर आज्ञा देंगी? यह शुभ क्षण मुझे कब प्राप्त होगा?
कब श्री रूप-मंजरी मुझे बार-बार आज्ञा देंगी, 'हे दासी, यहाँ आओ, शीघ्र मेरे सुंदर वस्त्र-आभूषण तैयार करो'?
उनकी आज्ञा पाकर मेरा हृदय आनंदित हो उठेगा, और उसी क्षण मैं शुद्ध मन से वह सेवा-कार्य करूँगी।
श्री रूप-मंजरी की सेवा में, कब मैं रत्नजड़ित थाली में पूजा-सामग्री सजाऊँगी? कब सोने के पात्र में सुगंधित जल भरूँगी?
कब मैं शीघ्रता से दिव्य युगल के सम्मुख यह सब ले जाऊँगी? नरोत्तम दास की यह दशा कब प्राप्त होगी?
इस भजन के बारे में
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- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।